नालंदा विश्वविद्यालय: पुनर्जनन का नया युग, छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि

राजगीर (नालंदा दर्पण)। प्राचीन भारत की गौरवशाली शैक्षणिक विरासत को पुनर्जनन की ओर ले जाता नालंदा विश्वविद्यालय एक बार फिर वैश्विक शिक्षा के केंद्र के रूप में उभर रहा है। बीते पांच वर्षों में इस विश्वविद्यालय ने छात्रों की संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की है, जो इसके बढ़ते प्रभाव और आधुनिक शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी साझा की, जिसमें विश्वविद्यालय की प्रगति और उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा दिया गया।

नालंदा विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर, शोधकार्य (पीएचडी) और लघुकालिक पाठ्यक्रमों के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। ये कार्यक्रम छह अध्ययन विद्यापीठों और चार अनुसंधान केंद्रों के माध्यम से संचालित हो रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 में जहां कुल 460 छात्रों ने विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था। वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 1,270 तक पहुंच गई है। इसमें 402 स्नातकोत्तर और पीएचडी छात्र शामिल हैं। जबकि 868 छात्र लघुकालिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं।

विशेष रूप से इस वर्ष भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का अनुपात भी उल्लेखनीय है। 2024-25 सत्र में 178 भारतीय छात्र और 224 अंतर्राष्ट्रीय छात्र विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं। यह आंकड़ा नालंदा विश्वविद्यालय की वैश्विक अपील और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की इसकी क्षमता को दर्शाता है।

नालंदा विश्वविद्यालय का नया परिसर  का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून 2024 को किया था। जोकि  न केवल शैक्षणिक दृष्टिकोण से बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी एक मिसाल है।

यह परिसर नेट-जीरो सुविधा के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें 6.5 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र, जल पुनर्चक्रण प्रणाली, वर्षाजल संचयन प्रणाली और लगभग 100 एकड़ में फैला हरित एवं जल क्षेत्र शामिल है।

परिसर में दो शैक्षणिक भवन, प्रशासनिक भवन, छात्रावास, स्टाफ व फैकल्टी आवास, गेस्ट हाउस, भोजनालय, एम्फीथिएटर, चिकित्सा केंद्र, योग केंद्र और खेल परिसर जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।

हालांकि, कुछ निर्माण कार्य जैसे पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, कैफेटेरिया, वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र और लैंडस्केपिंग का कार्य अभी प्रगति पर है। ये सुविधाएं परिसर को और अधिक समृद्ध और कार्यात्मक बनाएंगी।

नालंदा विश्वविद्यालय को नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित किया गया था। इसके लिए 2014 में 10 वर्षीय व्यय योजना के तहत 2,727.10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी।

विदेश राज्य मंत्री के अनुसार 31 मार्च 2025 तक इस राशि में से 2,066.05 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह वित्तीय निवेश विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वेशक नालंदा विश्वविद्यालय का यह पुनर्जनन न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय, जो कभी विश्व भर के विद्वानों के लिए ज्ञान का केंद्र था, अब आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ एक नया स्वरूप ले रहा है। यह संस्थान न केवल भारतीय छात्रों बल्कि अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

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