गिद्धि और पुष्पकरणी जैसी धरोहर को बचाने की नई मुहिम, 45 आर्द्रभूमि चिह्नित

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा की धरती ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के लिए विश्व प्रसिद्ध है। अब यहां प्राकृतिक संपदा को संरक्षित करने की दिशा में एक नया कदम उठा रही है। इस जिले में 45 आर्द्रभूमियों को चिह्नित किया गया है। इनमें गिद्धि और पुष्पकरणी जैसी झीलें और तालाब पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।

इन झीलों को बचाने और इनके वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग ने एक मास्टर प्लान तैयार करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। यह कदम न केवल इन झीलों की जैव-विविधता को संरक्षित करेगा, बल्कि भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण और पारिस्थितिकीय संतुलन को भी मजबूत करेगा।

गिद्धि और पुष्पकरणी झीलें प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करती हैं। ये बाढ़ के पानी को रोककर आपदा को कम करती हैं, भूजल स्तर को बढ़ाती हैं और प्रवासी पक्षियों सहित असंख्य जीव-जंतुओं को आश्रय देती हैं। ये झीलें नालंदा की सांस्कृतिक और पर्यटकीय पहचान का भी हिस्सा हैं। लेकिन, बढ़ते अतिक्रमण, प्रदूषण और अनदेखी के कारण इनका अस्तित्व खतरे में है।

वन विभाग ने गिद्धि और पुष्पकरणी झीलों को आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियमावली 2017 के तहत अधिसूचित करने का प्रस्ताव दिया है। अधिसूचना के बाद इन झीलों को कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा, जिससे इनके संरक्षण और प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा सकेगा।

जिला वन पदाधिकारी राजकुमार मनमोहन कहते हैं कि यह प्रयास नालंदा की प्राकृतिक धरोहर को बचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस मास्टर प्लान के तहत प्रवासी पक्षियों और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास, जल स्तर को बनाए रखने में मदद, प्राकृतिक आपदाओं को कम करने में सहायता, झीलों को आकर्षक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करना है।

वन विभाग ने स्थानीय लोगों को ‘वेटलैंड मित्र’ के रूप में शामिल करने की योजना बनाई है। ये स्वयंसेवक होंगे, जो स्वेच्छा से आर्द्रभूमियों के संरक्षण में योगदान देंगे। उनके कार्यों में स्कूलों और गाँवों में जागरूकता अभियान चलाना, झीलों की नियमित स्वच्छता और निगरानी, अतिक्रमण, प्रदूषण, या अवैध कचरे की सूचना देना, स्थानीय ज्ञान को संरक्षण योजनाओं में शामिल करना शामिल होंगे। ‘वेटलैंड मित्रों’ का चयन ग्राम सभाओं और स्थानीय निकायों के माध्यम से होगा। नालंदा वन विभाग उन्हें प्रशिक्षण, उन्मुखीकरण, और पहचान-पत्र प्रदान करेगा।

यह अभियान केवल वन विभाग तक सीमित नहीं है। सरकार ने धार्मिक संस्थानों, स्कूल-कॉलेजों, गैर-सरकारी संगठनों, पंचायत राज संस्थाओं, एनएसएस, एनसीसी, मछुआरों और स्थानीय समुदायों को इस पहल से जोड़ने की योजना बनाई है। गिद्धि और पुष्पकरणी झीलों के किनारे बसे गाँवों और शहरों के लोग इस अभियान की रीढ़ बन सकते हैं।

वेशक गिद्धि और पुष्पकरणी झीलें नालंदा की प्राकृतिक धरोहर हैं, और इनका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यह मास्टर प्लान और ‘वेटलैंड मित्र’ पहल न केवल इन झीलों को बचाएगी, बल्कि नालंदा को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया मुकाम दिलाएगी। जैसा कि जिला वन पदाधिकारी कहते हैं कि यह एक जन आंदोलन का रूप लेगा।

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