बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। पटना प्रमंडल कार्यालय के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक की जाँच में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग को हिलाकर रख दिया है।
इस मामले में नालंदा जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में कार्यरत लिपिक फणी मोहन पर गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। उन पर फर्जी भाउचर के जरिए सरकारी राशि का गबन करने और कार्यालय को गलत प्रतिवेदन देकर गुमराह करने का दोषी पाया गया है।
सूचना के अधिकार अधिनियम- 2005 के तहत प्राप्त सूचनाओं और भाउचरों की गहन जाँच के दौरान यह खुलासा हुआ कि भाउचर संख्या 26/23-24, 27/23-24 और 29/23-24 में दर्ज राशि संबंधित संचिकाओं से मेल नहीं खाती।
पहले ही उच्च अधिकारियों को भेजे गए जाँच प्रतिवेदनने स्पष्ट किया कि इन फर्जी भाउचरों के माध्यम से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। यह मामला सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।
जाँच के निष्कर्षों के आधार पर श्री फणी मोहन को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पटना जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है।
इस अवधि में उन्हें नियम-10 के तहत निर्धारित दर पर जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा। साथ ही उनके खिलाफ अलग से आरोप पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।



