मुख्यमंत्री के गांव-जवार के इस बूथ पर नहीं पड़े एक भी वोट, जानें वजह

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में चुनावी सरगर्मी के बीच एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। हरनौत प्रखंड की डिहरी पंचायत के मुसहरी गांव में स्थित बूथ संख्या 280 पर एक भी वोट नहीं पड़ा। यह बूथ मुख्यमंत्री के पैतृक गांव से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर है, जहां ग्रामीणों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मतदान का पूर्ण बहिष्कार कर दिया। ग्रामीणों की मुख्य मांग राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 20 पर बने एलिवेटेड रोड में अंडरपास का निर्माण है, जो उनके दैनिक जीवन को आसान बना सके।

यह घटना उस समय सामने आई, जब मतदान के दिन बूथ पर पहुंचे अधिकारी ग्रामीणों को मनाने की कोशिश कर रहे थे। प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) डॉ. पंकज कुमार और ब्लॉक पंचायती राज अधिकारी (बीपीआरओ) उमेश कुमार खुद मौके पर पहुंचे।

उन्होंने ग्रामीणों से वोट डालने की अपील की और उनकी समस्याओं को सुनने का आश्वासन दिया। लेकिन ग्रामीणों ने उनकी एक न सुनी और अपनी मांग पर अडिग रहे। गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में स्थापित इस बूथ पर कुल 715 मतदाता दर्ज हैं, जिनमें 381 पुरुष और 334 महिला वोटर शामिल हैं। पूरे दिन बूथ सूना पड़ा रहा और एक भी मतदाता वोट डालने नहीं पहुंचा।

ग्रामीणों का गुस्सा एनएच-20 को फोरलेन में अपग्रेड करने के दौरान बने एलिवेटेड रोड से जुड़ा है। जब राजमार्ग का काम चल रहा था, तब उन्होंने एलिवेटेड रोड में अंडरपास बनाने की मांग उठाई थी। इसके लिए ग्रामीणों ने कई बार विरोध प्रदर्शन किए, धरना दिया और अधिकारियों से गुहार लगाई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों की परेशानी का मुख्य कारण एलिवेटेड रोड का निर्माण है, जो उनके गांव को दो हिस्सों में बांट चुका है। मुसहरी गांव के अधिकांश लोग खेती किसानी पर निर्भर हैं और उनकी ज्यादातर जमीन फोरलेन के पूर्वी हिस्से में स्थित है। पहले वे सीधे रास्ते से अपनी खेतों तक पहुंच जाते थे।

पशुपालक अपने मवेशियों को चराने के लिए भी उसी तरफ ले जाते थे। लेकिन एलिवेटेड रोड बनने के बाद यह सीधा रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। अब ग्रामीणों को तीन-चार किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है, जो समय और मेहनत दोनों की बर्बादी है।

ग्रामीणों का कहना है कि सुबह खेत जाने में घंटों लग जाते हैं। पशुओं को ले जाना तो और मुश्किल हो गया है। बारिश के दिनों में कीचड़ और पानी से रास्ता और खराब हो जाता है। अंडरपास होता तो हमारी जिंदगी आसान हो जाती। यह समस्या सिर्फ एक-दो परिवारों की नहीं, पूरे गांव की है। महिलाएं भी प्रभावित हैं, क्योंकि वे दूध बेचने या सब्जी लेने बाजार जाती हैं तो अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। बच्चों की स्कूल जाने में भी दिक्कत होती है।

यह वोट बहिष्कार नालंदा जिले में विकास कार्यों की खामियों को उजागर करता है। एनएच-20 बिहार का महत्वपूर्ण राजमार्ग है, जो पटना को नालंदा और आगे के जिलों से जोड़ता है। फोरलेन अपग्रेडेशन का काम राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के तहत चल रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर अंडरपास बन जाता, तो न सिर्फ उनकी आवाजाही आसान होती, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होता। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह क्षेत्र होने के बावजूद यहां की समस्याएं अनसुनी रह जाना विकास मॉडल पर सवाल उठाता है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक अंडरपास नहीं बनेगा, वे किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। फिलहाल, एनएचएआई के स्थानीय अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन ग्रामीणों का आंदोलन जारी रहने की संभावना है।

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