CM नीतीश के दिल पर अवैध कब्जा हटाने में पुलिस-प्रशासन विफल

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिल माने जाने वाले राजगीर में जिला परिषद की जमीन पर अवैध कब्जा का मामला पिछले छह वर्षों से प्रशासनिक अनदेखी का शिकार बना हुआ है। नालंदा जिला परिषद की सामान्य बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि राजगीर थाना क्षेत्र में स्थित जिला परिषद की जमीन से अतिक्रमण हटाया जाएगा। बावजूद इसके अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

बताया जाता है कि वर्ष 2017 में राजगीर अंचलाधिकारी को जिला परिषद की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए विस्तृत सूची जारी की गई थी। इस सूची में 16 अतिक्रमणकारियों के नाम, उनके पते, अतिक्रमण का क्षेत्रफल और प्लॉट नंबर सहित सारी जानकारियां दी गई थीं। यह जानकारी जिला अभियंत्रण कार्यालय नालंदा से राजगीर अनुमंडल पदाधिकारी  और मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद को भी भेजी गई थी।

लेकिन  छह वर्षों के लंबे समय के बाद भी अंचलाधिकारी राजगीर की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस अवधि में अतिक्रमणकारियों का साहस बढ़ता चला गया और जिला परिषद की जमीन पर असामाजिक तत्वों ने कब्जा जमाना शुरू कर दिया।

वर्ष 2020 में जिला अभियंता नालंदा ने पुनः एक पत्र जारी कर पुलिस निरीक्षक और राजगीर थानाध्यक्ष को स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने जानकारी दी कि जिला परिषद की जमीन पर असामाजिक तत्वों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। जबकि इस जमीन पर दुकान बनाने की निविदा पूरी हो चुकी है और निर्माण कार्य शुरू किया जाना है।

इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। लेकिन यह आदेश फाइलों में दबकर रह गया।

इस मामले ने प्रशासन की निष्क्रियता और उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग और जिला परिषद के सदस्य यह समझने में असमर्थ हैं कि स्पष्ट आदेश और प्रमाण होने के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

जबकि जिला परिषद की जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण से न केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान हो रहा है, बल्कि विकास कार्यों पर भी असर पड़ रहा है। अतिक्रमणकारियों की गतिविधियों के कारण स्थानीय लोग भयभीत हैं और इस क्षेत्र का विकास बाधित हो रहा है।

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