पॉल्ट्री फार्म में लगी भीषण आग में 5 हजार चूजे राख, 5 लाख से अधिक का नुकसान

खोदागंज थाना क्षेत्र के चूल्हाई बिगहा गांव में भीषण अगलगी, हजारों चूजे और उपकरण जलकर नष्ट; ग्रामीणों के प्रयास के बावजूद नहीं बच सका पॉल्ट्री फार्म

हिलसा (नालंदा दर्पण)। खोदागंज थाना क्षेत्र के महमूदा पंचायत अंतर्गत चूल्हाई बिगहा गांव के टोला मधुकर चक के दक्षिण खंधा स्थित एक पॉल्ट्री फार्म में अचानक आग लग जाने से भारी तबाही मच गई।

इस अगलगी की घटना में करीब पांच लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जलकर राख हो गई। आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते पूरा फार्म धू-धू कर जलने लगा और उसमें मौजूद हजारों चूजे समेत सभी उपकरण नष्ट हो गए।

पॉल्ट्री फार्म के संचालक अखिलेश कुमार ने बताया कि वे इस फार्म में मुर्गी के चूजों का पालन-पोषण कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। घटना के समय फार्म में लगभग पांच हजार चूजे मौजूद थे, जो आग की चपेट में आकर पूरी तरह जल गए।

इसके अलावा चूजों के लिए रखा गया करीब 35 बोरा दाना, चार सौ प्लास्टिक की फीडिंग बाल्टियां, आठ सौ पानी पिलाने वाली प्लास्टिक बाल्टियां, दो लकड़ी की चौकी, चार प्लास्टिक की कुर्सियां तथा अन्य जरूरी उपकरण भी जलकर नष्ट हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और पॉल्ट्री फार्म में लगे बोरिंग के सहारे आग बुझाने का भरसक प्रयास किया।

ग्रामीणों ने बाल्टी और पाइप के माध्यम से लगातार पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि तब तक पूरा फार्म जलकर राख हो चुका था।

ग्रामीणों के अनुसार आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान के अनुसार शॉर्ट सर्किट या अत्यधिक गर्मी के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आ सकेगा।

इस घटना के बाद पॉल्ट्री संचालक अखिलेश कुमार और उनके परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि इस फार्म से ही उनके परिवार की आजीविका चलती थी और अचानक हुए इस नुकसान से वे पूरी तरह टूट गए हैं।

उन्होंने प्रशासन से आर्थिक सहायता और मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे फिर से अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।

स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन से पीड़ित किसान को तत्काल राहत देने की अपील की है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं ग्रामीण उद्यमियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं और समय पर सरकारी मदद मिलने से उन्हें पुनः खड़ा होने में सहारा मिल सकता है।  स्रोत: मीडिया रिपोर्ट

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