भारत के 10 सर्वाधिक प्रदूषित बिहार के 4 शहरों में राजगीर भी शामिल

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बेंगलुरु स्थित ऊर्जा व स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी की है, जिसमें बिहार के चार शहर हाजीपुर, सासाराम, पटना और राजगीर शामिल हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली अब देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है। जबकि असम-मेघालय सीमा पर स्थित बर्नीहाट ने सबसे प्रदूषित शहर का स्थान हासिल किया है।

सीआरईए की रिपोर्ट 2025 की पहली छमाही के दौरान देशभर के 293 शहरों में निरंतर परिवेशीय वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों (सीएएक्यूएमएस) से एकत्र किए गए आंकड़ों पर आधारित है। इन आंकड़ों में हवा में मौजूद पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर 2.5) के स्तर की विस्तृत निगरानी की गई, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होता है।

सीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की वेबसाइट से प्राप्त डेटा के विश्लेषण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि बिहार के किसी भी शहर में इस अवधि में वायु गुणवत्ता अच्छी नहीं रही।

हाजीपुर: देश में तीसरे स्थान पर काबिज हाजीपुर में पीएम 2.5 का औसत स्तर 85 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। यहां पिछले छह महीनों में केवल 13 दिन वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही। जबकि एक दिन तो स्थिति गंभीर श्रेणी में पहुंच गई।

सासाराम: यहां पीएम 2.5 का स्तर 69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मापा गया।

पटना: राज्य की राजधानी में यह स्तर 68 रहा।

राजगीर: ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के शहर राजगीर में पीएम 2.5 का स्तर 65 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो भारतीय मानकों के अनुसार भी चिंताजनक है।

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मानकों के आधार पर 122 शहर प्रदूषित पाए गए, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कठोर मानकों को देखें तो सभी 293 शहर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। बर्नीहाट में पीएम 2.5 का औसत स्तर 133 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो साल की पहली छमाही में ज्यादातर समय बहुत खराब श्रेणी में रहा। दिल्ली, गाजियाबाद, गुरुग्राम, तालचेर और राउरकेला जैसे शहर भी इस सूची में शामिल हैं।

सीआरईए ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण अब न केवल बड़े शहरों, बल्कि छोटे शहरों जैसे राजगीर और सासाराम में भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है। पीएम 2.5 कण फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे सांस की बीमारियां, हृदय रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे शहरों में औद्योगिक गतिविधियों, वाहन उत्सर्जन और निर्माण कार्यों के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

बहरहाल सबसे बड़ी चिंता का विषय है कि राजगीर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। वह अब प्रदूषण की मार झेल रहा है। यहां बढ़ते पर्यटन के बीच वाहनों की संख्या और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों ने हवा की गुणवत्ता को प्रभावित किया है। यहां  प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। ताकि इस शहर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को बचाया जा सके।

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