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पंचायत समिति की बैठक में अवैध वसूली को लेकर अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों में तू-तू-मैं-मैं !

Recovery of 25-35 hundred rupees in housing list and Anganwadi, tussle between officials and public representatives!
Recovery of 25-35 hundred rupees in housing list and Anganwadi, tussle between officials and public representatives!

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहारशरीफ सदर प्रखंड कार्यालय सभागार में आयोजित पंचायत समिति की बैठक उस समय हंगामे में तब्दील हो गई जब जनप्रतिनिधियों ने सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। खासतौर पर प्रधानमंत्री आवास योजना और आंगनबाड़ी केंद्रों से अवैध वसूली के गंभीर आरोपों को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

इस बैठक में कई जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में नाम जोड़ने के लिए 2500 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। इतना ही नहीं आवास मिलने के बाद लाभार्थियों से 25000 रुपये की मांग की जाती है और पैसे नहीं देने पर सूची से नाम काटने की धमकी दी जाती है।

वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर भी गंभीर खुलासे हुए। बताया गया कि केंद्रों से हर महीने 3500 रुपये की जबरन वसूली की जाती है। जिससे बच्चों को जरूरी पोषण सामग्री नहीं मिल पाती। बच्चों को बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं है और भीषण ठंड में भी वे जमीन पर बैठने को मजबूर हैं।

इसबैठक में मनरेगा योजना में लूट-खसोट के आरोप भी सामने आए। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि काम के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है और मजदूरों को उनका हक नहीं मिल रहा। वहीं पीडीएस के तहत गरीबों को मिलने वाले अनाज की कालाबाजारी का भी मामला उठा। कई पंचायतों में फर्जी तरीके से अनाज उठाकर उसे बाजार में बेचा जा रहा है।

राजगीर जदयू विधायक कौशल किशोर भ्रष्टाचार के इन आरोपों पर सख्त नजर आए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में इस तरह की अवैध वसूली से सरकार की छवि धूमिल हो रही है, जो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे बीडीओ, सुपरवाइजर, आवास सहायक समेत अन्य पदाधिकारियों और कर्मियों की संपत्ति जांच की अनुशंसा करेंगे।

विधायक की इस घोषणा के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया। वहीं जनप्रतिनिधियों ने इस बात के सबूत भी पेश किए कि अवैध वसूली की शिकायतें केवल आरोप नहीं, बल्कि उनके पास व्हाइस रिकॉर्डिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग के रूप में प्रमाण भी मौजूद हैं।

इस बैठक के दौरान महादलित विकास मिशन के तहत बने सामुदायिक भवनों पर अवैध कब्जे का मुद्दा भी उठा। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि कुछ प्रभावशाली लोग इन भवनों पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमाए बैठे हैं। इस पर अधिकारियों ने सख्त कदम उठाने की बात कही और एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया।

अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब देखने वाली बात होगी कि क्या प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा या यह मामला सिर्फ बैठक में हो हंगामा तक ही सीमित रह जाएगा। जनप्रतिनिधियों ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विधायक द्वारा की गई संपत्ति जांच की अनुशंसा के बाद अब कई अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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