प्रधानाध्यापक पदभार को लेकर नई गाइडलाइन जारी, जानें अब कौन संभालेगा स्कूल

“अनुभव आधारित मानदंड से अब प्रधानाध्यापक पद की संवैधानिक नियुक्ति” “शिक्षा विभाग ने स्कूल नेतृत्व के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया” “सरकारी विद्यालयों में अनुभवी शिक्षकों को मिलेगी प्राथमिकता” “नए मानदंड से विद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास” “माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षकों के अनुभव के आधार पर तय होगी वरीयता”

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में प्रशासनिक व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। प्रधानाध्यापक के पदभार को लेकर लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति को समाप्त करते हुए अब स्पष्ट और अनुभव-आधारित गाइडलाइन जारी कर दी गई है। यह गाइडलाइन प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी की गई है, जिसका उद्देश्य योग्य और अनुभवी शिक्षकों को नेतृत्व की जिम्मेदारी देना है।

नई व्यवस्था के तहत प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का प्रभार पाने के लिए न्यूनतम चार से आठ वर्ष तक का शिक्षण अनुभव अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने कुछ वैकल्पिक योग्यताएं भी निर्धारित की हैं, ताकि योग्य शिक्षक अवसर से वंचित न रहें।

माध्यमिक विद्यालयों (कक्षा 9 से 10) के लिए गाइडलाइन में कहा गया है कि स्थानीय निकाय के प्रशिक्षित शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक अथवा विद्यालय अध्यापक के रूप में कम से कम आठ वर्षों का अध्यापन अनुभव आवश्यक होगा।

वहीं उच्च माध्यमिक विद्यालयों (कक्षा 11 से 12) में प्रधानाध्यापक पदभार की वरीयता के लिए स्थानीय निकाय के प्रशिक्षित शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक और विद्यालय अध्यापकों को न्यूनतम चार वर्षों का शिक्षण अनुभव होना चाहिए।

शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक दोनों स्तर के योग्य शिक्षक उपलब्ध हों, वहां वरीयता निर्धारण समान योग्यता के आधार पर किया जाएगा।

ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित उच्च माध्यमिक शिक्षक और वे प्रशिक्षित माध्यमिक शिक्षक, जिनकी स्नातकोत्तर योग्यता के साथ-साथ चार वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका हो, दोनों को समान वरीयता दी जाएगी।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस गाइडलाइन से विद्यालयों में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुभव का सही उपयोग हो सकेगा। इससे न केवल विद्यालयों के संचालन में सुधार होगा, बल्कि शिक्षण गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

स्थानीय स्तर पर शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब प्रधानाध्यापक पदभार को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी।

समाचार स्रोत:  मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स

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