प्राचीन भारत
- गिरियक
अनमोल साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर का संगम है गिरियक
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिला बिहार का एक ऐसा क्षेत्र है, जो अपनी प्राचीनता सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक महत्व के लिए विश्वविख्यात है। इस जिले का गिरियक गांव न केवल पुरातात्विक अवशेषों और बौद्ध धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह साहित्य, संस्कृति और इतिहास के संगम का एक जीवंत उदाहरण…
- फीचर्ड
तिरंगे की रोशनी में जगमगाया Nalanda प्राचीन विश्वविद्यालय
राजगीर (नालंदा दर्पण)। आजादी की 79वीं वर्षगांठ के अवसर पर विश्व धरोहर स्थल नालंदा (Nalanda) प्राचीन विश्वविद्यालय का भग्नावशेष तिरंगे की रंग-बिरंगी रोशनी से सराबोर हो उठा। इस ऐतिहासिक स्थल पर स्थित सारिपुत्र स्तूपा को राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों केसरिया, श्वेत और हरे की रोशनी से सजाया गया, जिसने पूरे परिसर…
- खोज-खबर
चीन की दीवार से पुरानी राजगीर साइक्लोपियन वाल की अनकही कहानी
राजगीर (नालंदा दर्पण)। क्या आपने कभी सुना है कि बिहार में एक ऐसी दीवार है, जो चीन की महान दीवार से भी पुरानी है? जी हाँ, वह है राजगीर साइक्लोपियन वाल। एक ऐतिहासिक धरोहर जो न केवल समय की परीक्षा में खड़ी रही है, बल्कि अब एक नई पहचान की ओर…
- खोज-खबर
प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के विध्वंस में ब्राह्मणों की भूमिका का सच
नालंदा दर्पण डेस्क / मुकेश भारतीय। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 5वीं शताब्दी में हुई थी और यह भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के सबसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक माना जाता था। इस विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य बौद्ध धर्मशास्त्र, विज्ञान, गणित और दर्शनशास्त्र के क्षेत्रों में उच्च स्तरीय अध्ययन और…




