
राजगीर (नालंदा दर्पण रिपोर्टर)। नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालंदा द्वारा आयोजित जेठियन टू राजगीर धम्म पदयात्रा का समापन राजगीर के ऐतिहासिक वेणुवन में शनिवार को हुआ। इस पदयात्रा में श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, वियतनाम, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, अमेरिका, जापान, चीन, लाओस आदि देशों के बौद्ध के अलावे नव नालंदा महाविहार के शिक्षकों, कर्मचारियों, देशी विदेशी छात्र-छात्राओं, अध्ययनरत भिक्षु-भिक्षुणियां शामिल हुये।
12वीं जेठियन टू राजगीर धम्म यात्रा का आयोजन लाइट ऑफ बुद्धा धम्म फाउंडेशन इंटरनेशनल, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति, इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन, नई दिल्ली, पर्यटन विभाग, बिहार सरकार तथा जेठियन ग्रामवासियों के सहयोग से किया गया है।
महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में आयोजित यह यात्रा जेठियन ग्राम (प्राचीन नाम यष्ठिवन) से प्रारंभ होकर प्राचीन बुद्ध चारिका पथ से होते हुए लगभग 15 किलोमीटर दूर वेणुवन, राजगीर में सम्पन्न हुई।
इस यात्रा में 1500 धम्म यात्रियों एवं श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक आयाम प्रदान किया है। यह वही पावन मार्ग है जिससे भगवान बुद्ध सम्यक सम्बोधि प्राप्ति के बाद सारनाथ में धम्मचक्र प्रवर्तन के बाद मगध सम्राट बिम्बिसार से मिलने राजगृह आए थे।
मगधराज बिम्बिसार ने यष्ठिवन (वर्तमान जेठियन) में स्वयं उपस्थित होकर तथागत का स्वागत किया था। आदरपूर्वक उन्हें राजकीय उद्यान वेणुवन में ठहराया था। जिसे बाद में उन्होंने दानस्वरूप भिक्षुसंघ को अर्पित कर दिया। इस अवसर पर कुलपति प्रो। सिद्धार्थ सिंह कहा कि यह मार्ग केवल एक ऐतिहासिक पथ नहीं, बल्कि बुद्धत्व की ओर अग्रसर मानवता के कदमों की गूंज है।
भगवान बुद्ध ने अपने जीवन में अनेक बार इसी मार्ग से चारिका की अनगिनत उपदेश दिए, और यही पथ फाह्यान और ह्वेनसांग जैसे महान बौद्ध यात्रियों की आध्यात्मिक यात्रा का मौन साक्षी रहा है यह धम्म यात्रा केवल स्मरण का आयोजन नहीं, बल्कि शांति, करुणा और सह- अस्तित्व की उस अमर परंपरा का पुनर्जीवन है, जिसे बुद्ध ने संसार को दिया।
उन्होंने कहा कि यह पूर्णतः न्यायसंगत है कि इस दिवस को बुद्धचारिका दिवस के रूप में घोषित किया जाय। कुलपति ने गया एवं नालंदा जिला प्रशासन तथा वन विभाग के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक सहयोग के बिना इतने व्यापक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन को सफलतापूर्वक सम्पन्न करना संभव नहीं है।
जिला प्रशासन तथा वन विभाग ने जिस तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ सहयोग प्रदान किया है। वह अत्यंत प्रशंसनीय है। यह धम्म यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि हमारे देश और बिहार की आध्यात्मिक गाथा का सशक्त प्रतीक है। आज जब सम्पूर्ण विश्व शांति के मार्ग की तलाश में है। ऐसे समय में यह पावन यात्रा बिहार की ओर से मानवता के लिए एक प्रेरक संदेश प्रस्तुत करती है।
इस कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय के उप सचिव नदीम अहमद, वागमों डिक्सी, रिचर्ड डिक्सी, विधायक रोमित कुमार, कुलसचिव प्रो. रूबी कुमारी, बौद्ध मठों के मुख्य भिक्षु, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधि एवं अन्य प्रमुख लोग शामिल हुये यात्रा कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. सुरेश कुमार द्वारा किया गया।





