हिलसा में मिसाल बना करोड़ों का सम्राट अशोक भवन, जरा देख लीजिए हालत

हिलसा (नालंदा दर्पण ब्यूरो)। हिलसा नगर परिषद क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा सम्राट अशोक भवन अब महज एक सरकारी निर्माण परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि यह कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक उदासीनता और नियमों की खुली अवहेलना का प्रतीक बनता जा रहा है। जिस भवन से नगर परिषद की कार्यकुशलता और विकास की तस्वीर सामने आनी थी, वही भवन अब सवालों, आरोपों और जांच के घेरे में है।
ई-टेंडर संख्या 08/23-24 के तहत स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य शुरू से ही विवादों में रहा है। सरकारी भवन निर्माण से जुड़े स्पष्ट नियम हैं कि किसी भी निर्माण स्थल पर एक सूचना बोर्ड लगाया जाना अनिवार्य है, जिसमें योजना का नाम, स्वीकृत राशि, कार्य अवधि, संवेदक का नाम, कार्यदायी एजेंसी और संबंधित अभियंता की जानकारी प्रदर्शित की जाए।
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सम्राट अशोक भवन के निर्माण स्थल पर ऐसा कोई सूचना बोर्ड आज तक नहीं लगाया गया। इससे न केवल पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े होते हैं, बल्कि यह भी संदेह गहराता है कि आखिर किसे और क्यों इस परियोजना की जानकारी आम जनता से छिपाने की जरूरत पड़ी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह निर्माण कार्य हिलसा अनुमंडल कार्यालय परिसर में ही चल रहा है। यही वह परिसर है जहां प्रतिदिन अनुमंडलीय पदाधिकारी, एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहते हैं।
ऐसे में इतने लंबे समय तक अनियमितताओं का चलते रहना प्रशासनिक निगरानी की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं दिया, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं। यह प्रश्न अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब 20 जनवरी 2026 की रात बिना किसी पूर्व सूचना, बिना अभियंता की उपस्थिति और बिना गुणवत्ता परीक्षण के सीढ़ी की ढलाई कराई गई। शिकायत मिलने के बाद जब जांच हुई तो निर्माण में गंभीर अनियमितता पाई गई।
इसके बाद नगर प्रशासन ने अगले ही दिन रात में कराई गई ढलाई को तुड़वा दिया। यह कार्रवाई अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं था। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वीडियो और फोटो साक्ष्य एकत्र कर लोक शिकायत कार्यालय में प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे मामला और भी मजबूत हो गया है।
सूत्रों के अनुसार करीब 10 महीने पहले शुरू हुआ यह निर्माण कार्य अब तक अधूरा पड़ा है। इतने लंबे समय के बाद भी न तो भवन का ढांचा पूरा हो सका और न ही निर्माण की गुणवत्ता को लेकर कोई संतोषजनक स्थिति सामने आई है।
आरोप है कि बिना नियमित तकनीकी जांच, मटेरियल टेस्ट और अभियंता की सतत निगरानी के काम कराया जा रहा था। घटिया सामग्री के उपयोग और जल्दबाजी में निर्माण कराने के कारण भवन की मजबूती पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर तब और उंगली उठी जब परिवादकर्ता प्रवीण कुमार ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत इस निर्माण से संबंधित जानकारी मांगी।
आरोप है कि न तो निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध कराई गई और न ही अपीलीय आदेशों का पालन किया गया। यह रवैया न केवल आरटीआई कानून का उल्लंघन माना जा रहा है, बल्कि इसे प्रशासनिक जवाबदेही से बचने का प्रयास भी कहा जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, हिलसा ने परिवाद को स्वीकार कर लिया है और 02 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 11 बजे सुनवाई की तिथि निर्धारित की है। यह सुनवाई लोक शिकायत कार्यालय, हिलसा में होगी, जिस पर अब पूरे नगर की निगाहें टिकी हैं।
इस संबंध में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी रविशंकर कुमार ने स्वीकार किया कि अनुमंडल परिसर में सम्राट अशोक भवन का निर्माण कार्य चल रहा है और रात में बिना सूचना निर्माण कराए जाने की शिकायत मिली थी।
उन्होंने बताया कि संबंधित संवेदक को नोटिस जारी कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गुणवत्ता से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा।
वहीं नगर परिषद के जेई रोहित कुमार ने कहा कि संवेदक द्वारा बिना सूचना के रात में कार्य कराया गया था, जिसमें अनियमितता पाई गई। इसी कारण रात में की गई सीढ़ी ढलाई को तुड़वाया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की इस सरकारी योजना में दोषी पाए जाने पर क्या संबंधित संवेदक और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
जनता को उम्मीद है कि लोक शिकायत कार्यालय की सुनवाई से सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी। ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।





