
राजगीर (नालंदा दर्पण)। आगामी 14 जनवरी से आरंभ होने वाले सात दिवसीय राजकीय मकर मेला को लेकर राजगीर में तैयारियों का दौर तेज हो गया है। शहर का माहौल धीरे-धीरे उत्सवमय बनने लगा है।
पतंग उत्सव और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी में जहां युवा वर्ग पूरे उत्साह के साथ जुटा हुआ है, वहीं कृषि उत्पाद प्रदर्शनी को लेकर किसान भी अपने- अपने उत्पादों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करने की तैयारी में लगे हैं।
मकर मेला के दौरान आयोजित होने वाले पारंपरिक दंगल के लिए विभिन्न क्षेत्रों के नामचीन पहलवानों को आमंत्रित किया जा रहा है, जिससे कुश्ती प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
इसके साथ ही दुधारू पशु प्रदर्शनी के लिए पशुपालक अपने पशुओं की देखभाल और तैयारी में जुट गए हैं। दही खाओ प्रतियोगिता और रील प्रतियोगिता को लेकर संभावित प्रतिभागी काफी पहले से अभ्यास में लग गए हैं।
सभी प्रतियोगिताओं में आकर्षक पुरस्कारों की घोषणा के कारण प्रतिभागियों में प्रतिस्पर्धा का जोश चरम पर है। यह मेला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, पशुपालन और लोकसंस्कृति को भी बढ़ावा देता है।
हालांकि इतनी व्यापक तैयारियों के बावजूद मकर मेला के प्रचार-प्रसार को लेकर अबतक निराशाजनक स्थिति बनी हुई है। शहर में कहीं न तो बैनर-पोस्टर नजर आ रहे हैं और न ही अन्य प्रचारात्मक गतिविधियां शुरू हो सकी हैं। जबकि यह मेला मगध क्षेत्र के सबसे बड़े मेलों में से एक माना जाता है।
इस सात दिवसीय मेले में मगध के विभिन्न जिलों से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक राजगीर पहुंचते हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालु राजगीर के प्रसिद्ध गर्म जल के कुंडों और झरनों में मकर स्नान करते हैं। इसके बाद वे तिलकुट, दही-चूड़ा जैसे पारंपरिक मकर संक्रांति के व्यंजनों का आनंद लेते हैं। राजगीर की पहाड़ियों, ट्रैकिंग मार्गों और प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी करते हैं।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रचार-प्रसार शुरू किया जाए तो इस वर्ष मकर मेला और भी भव्य तथा सफल हो सकता है। उनका सुझाव है कि राजगीर महोत्सव के लिए बनाये गये तोरणद्वार सभी के सभी अभी भी लगे हैं। केवल उसके बैनर को बदल दिया जाय तो राजकीय मकर का प्रचार प्रसार केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो सकता है। पर्यटकों द्वारा इसका व्यापक प्रचार प्रसार हो सकता है।





