लोकायन नदी का उतरा पानी, मुहाने नदी का मुंह खोले सरकार

हिलसा (नालंदा दर्पण)। फल्गु नदी की सहायक लोकायन नदी में आई बाढ़ ने हिलसा अनुमंडल के एकंगरसराय, हिलसा, और करायपरसुराय प्रखंडों में भारी तबाही मचाई थी। कई स्थानों पर तटबंध टूटने से गांवों में पानी घुस गया था, लेकिन अब नदी का जलस्तर काफी कम हो गया है। प्रभावित गांवों से पानी निकलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में जमा पानी के कारण मच्छरों और कीटों की समस्या बढ़ गई है।

लोकायन नदी के तटबंधों में धुरी बिगहा गांव के पास लगभग 60 फीट और भुतही नदी के पूर्वी तटबंध में आंकोपुर गांव के पास 30 फीट का कटाव हुआ था। इन दोनों स्थानों पर मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। प्रशासन की सक्रियता से जलस्तर घटने के बाद स्थिति में सुधार हुआ है।

बाढ़ से प्रभावित गांवों जैसे धुरी बिगहा, छियासठ बिगहा, फुलवरिया, लक्कड़ बीघा, कुसेता, डोमना बिगहा, मुरलीगढ़ और सोहरापुर के खेतों से अब अधिकांश पानी निकल चुका है। हालांकि, हसनपुर, हरबंशपुर और मड़वा गांवों में स्थिति अभी भी गंभीर है। हसनपुर गांव के मछली तालाब के पास तीन तटबंध टूटने से इन गांवों में पानी घुस गया था, जिससे धान की फसल और अन्य कृषि सामग्री पूरी तरह बर्बाद हो गई।

महादलित टोले में दर्जनों घरों में पानी भर गया, जिसके कारण कई परिवारों को अन्य स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई सहायता नहीं पहुंची है, न ही कोई पदाधिकारी स्थिति का जायजा लेने आया है।

कोरामा से मणीचक होते हुए फुलवरिया गांव को जोड़ने वाली पक्की सड़क अचानक क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर पहले एक हल्का गड्ढा था, जिसमें लोग कपड़े धो रहे थे। इसी दौरान बालू लदा ट्रक गुजरने से सड़क बुरी तरह धंस गई। अब इस मार्ग पर चार पहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद है।

किसानों की मांग: मुहाने नदी का मुंह खोले सरकार

अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष मुनीलाल यादव ने विधायक संदीप सौरव और विधान परिषद सदस्य शशि यादव को पत्र लिखकर मुहाने नदी का मुंह खोलने की मांग की है।

उन्होंने बताया कि जहानाबाद में फल्गु नदी से उदेरा स्थान पर मुहाने नदी का मुंह वर्षों से बंद है, जिससे नालंदा जिले के इस्लामपुर, हिलसा, परवलपुर, बेन, थरथरी, चंडी, नगरनौसा और हरनौत के किसानों की सिंचाई व्यवस्था ठप हो गई है।

यादव ने कहा कि नदी में पानी की कमी से न केवल खेती प्रभावित हुई है, बल्कि चापाकल और कुओं का जलस्तर भी गिर गया है। इसके अलावा लोकायन नदी के तटबंध टूटने से बाढ़ की समस्या बढ़ रही है। यदि मुहाने नदी का मुंह खोला जाए और जल का समुचित बंटवारा हो, तो सूखा और बाढ़ दोनों समस्याओं से राहत मिल सकती है।

किसान महासभा ने बताया कि सरकार ने मुहाने नदी के तटबंध और बियर निर्माण पर अब तक 540 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन किसानों को इसका कोई व्यावहारिक लाभ नहीं मिला। महासभा ने सरकार से इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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