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निगरानी DSP ने इस्लामपुर के फर्जी शिक्षक पर जहानाबाद में दर्ज कराई FIR

Vigilance DSP lodged an FIR against a fake teacher from Islampur in Jehanabad.

इन फर्जी शिक्षकों को नियोजन वर्ग-2009 के तहत मैट्रिक, इंटर, स्नातक और बीएड के अंकों के आधार पर जहानाबाद में नियुक्त किया गया था। जांच के दौरान उनके बीएड अंक पत्र को भी उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर (ओडिशा) में सत्यापन के लिए भेजा गया, जहां यह फर्जी पाया गया…

नालंदा दर्पण डेस्क। जहानाबाद जिले में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के आधार पर शिक्षक के पद पर नियुक्त दो व्यक्तियों के खिलाफ निगरानी विभाग ने कड़ा कदम उठाया है। निगरानी के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) विंध्याचल प्रसाद की लिखित शिकायत के आधार पर नगर थाने में दो शिक्षकों तौकीर आलम और मो. इरशाद के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। यह कार्रवाई नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच के दौरान सामने आए फर्जीवाड़े के बाद की गई है।

निगरानी विभाग ने नियोजित शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए जिलावार विशेष पदाधिकारियों की नियुक्ति की थी। जहानाबाद जिले में यह जिम्मेदारी निगरानी DSP विंध्याचल प्रसाद को सौंपी गई थी। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) और नियोजन इकाई, जिला परिषद द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच के दौरान दो शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

तौकीर आलम नालंदा जिले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के काजियाना गांव का निवासी बताया जाता है। वह  उत्क्रमित उच्च विद्यालय लखापुर में नियोजित माध्यमिक शिक्षक के रूप में कार्यरत था। जांच में पाया गया कि उनके द्वारा प्रस्तुत बीएड (प्रशिक्षण) का अंक पत्र फर्जी था। यह अंक पत्र उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर (ओडिशा) से सत्यापित कराया गया, जहां इसे जाली पाया गया।

वहीं पटना जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के नौधरवा गांव निवासी मो. इरशाद राजकीयकृत उच्च विद्यालय सागरपुर में नियोजित माध्यमिक शिक्षक के रूप में कार्यरत था। इन्हें नियोजन वर्ग-2009 के तहत मैट्रिक, इंटर, स्नातक और बीएड के अंकों के आधार पर नियुक्त किया गया था। जांच के दौरान उनके बीएड अंक पत्र को भी उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर (ओडिशा) में सत्यापन के लिए भेजा गया, जहां यह फर्जी पाया गया।

निगरानी DSP विंध्याचल प्रसाद ने बताया कि यह जांच राज्य सरकार के निर्देश पर की जा रही है, जिसका उद्देश्य शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर नियुक्तियों को उजागर करना और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी न केवल शिक्षा प्रणाली को कमजोर करती है, बल्कि योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का भी हनन करती है।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दोनों शिक्षकों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निगरानी विभाग ने अन्य जिलों में भी इसी तरह की जांच तेज करने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार जहानाबाद जिले में कई अन्य नियोजित शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच चल रही है और जल्द ही इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

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