CM ने सालेपुर-नरसंडा-तेलमर-करौटा एवं बुद्ध सर्किट फोरलेन निर्माण का किया निरीक्षण
इस फोरलेन सड़क परियोजना के पूरा होने से नालंदा और आसपास के क्षेत्रों में यातायात की स्थिति में सुधार होगा। प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल और पर्यटन स्थल राजगीर पटना और अन्य क्षेत्रों से और भी आसानी से जुड़ जाएगा। इससे स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी..

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज नालंदा जिले में सालेपुर-नरसंडा-तेलमर-करौटा सड़क (एसएच-78) और सालेपुर से राजगीर बुद्ध सर्किट फोरलेन पथ के निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को सड़क निर्माण को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगी।
सालेपुर-नरसंडा-तेलमर-करौटा सड़क, जो बिहटा-सरमेरा (एसएच-78) से शुरू होकर एनएच-30 (पटना-मोकामा के जगदंबा स्थान मोड़) पर समाप्त होती है, उसे फोरलेन सड़क के रूप में विकसित किया जाएगा। यह सड़क राजगीर जाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में महत्वपूर्ण है। इस सड़क के चौड़ीकरण से न केवल आवागमन में सुगमता आएगी, बल्कि यात्रियों का समय भी बचेगा। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान सड़क के एलायनमेंट, निर्माण की प्रगति और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने सालेपुर से राजगीर तक प्रस्तावित बुद्ध सर्किट फोरलेन सड़क के एलायनमेंट का भी निरीक्षण किया। वर्तमान में टू-लेन वाली इस सड़क को फोरलेन में अपग्रेड किया जाएगा। यह सड़क बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थल राजगीर को पटना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बुद्ध सर्किट के अंतर्गत आने वाले इस मार्ग के विकास से नालंदा, राजगीर और अन्य बौद्ध स्थलों तक पहुंच आसान होगी। जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस सड़क के मार्ग में पड़ने वाली रेलवे लाइन के ऊपर एक एलिवेटेड सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह तकनीकी समाधान यातायात को निर्बाध बनाए रखने में सहायक होगा। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को इसे जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने सालेपुर मोड़, चौहान मोड़, बेलदारीपर और नूरसराय में भी निर्माण स्थलों का दौरा किया। उन्होंने सड़क के डिजाइन, भूमि अधिग्रहण की स्थिति और अन्य तकनीकी पहलुओं पर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि परियोजना में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न किया जाए और स्थानीय लोगों को न्यूनतम असुविधा हो।
निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, कुमार रवि, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, पटना के जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह और नालंदा के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ब बिहार को बेहतर सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना है, ताकि विकास की गति को और तेज किया जा सके। यह परियोजना नालंदा और राजगीर के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगी।










