अब राजगीर से अहमदाबाद तक अब सीधी ट्रेन सेवा, जान लें समय सारणी
पर्यटन नगरी राजगीर से पहली बार गुजरात तक सीधी ट्रेन सेवा की शुरुआत से न सिर्फ स्थानीय यात्रियों को बल्कि पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। खासकर उन यात्रियों के लिए यह सेवा राहत लेकर आई है जो अब तक राजगीर से अहमदाबाद जाने के लिए पटना या अन्य स्टेशनों का सहारा लेते थे...
राजगीर (नालंदा दर्पण)। राजगीर आने-जाने वाले पर्यटकों और आम यात्रियों के लिए एक बड़ी सौगात मिली है। अब राजगीर से सीधी ट्रेन सेवा के माध्यम से गुजरात के अहमदाबाद तक का सफर और भी सुगम हो गया है। राजगीर-पटना स्पेशल ट्रेन को नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार और राजगीर विधायक कौशल किशोर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। इस अवसर पर एसएसई प्रभारी दिलीप कुमार, एसएसई आनंद प्रकाश और स्टेशन प्रबंधक चंद्रभूषण सिन्हा समेत कई रेलवे अधिकारी मौजूद रहे।
रेलवे अधिकारियों ने जानकारी दी कि यह ट्रेन पहले पटना तक स्पेशल सेवा के रूप में चलेगी, और वहां से अजीमाबाद एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 12947/48) बनकर अहमदाबाद के लिए प्रस्थान करेगी। राजगीर से चलने वाली यह ट्रेन बिहार शरीफ, बख्तियारपुर और फतुहा होते हुए पटना पहुंचेगी, जहां से यह आगे दानापुर, आरा, बक्सर, दीनदयाल उपाध्याय, विंध्याचल, प्रयागराज, कानपुर, टूंडला, आगरा फोर्ट, सवाई माधोपुर, कोटा, रतलाम, छायापुरी, नडियाल जंक्शन होते हुए गुजरात के अहमदाबाद तक जाएगी।
यह सेवा सप्ताह में दो दिन बुधवार और शुक्रवार को उपलब्ध रहेगी। ट्रेन का प्रस्थान समय रात्रि 8:00 बजे राजगीर से तय किया गया है, जो रात्रि 11:10 बजे पटना पहुंचेगी। इसके बाद रात्रि 11:45 बजे यह ट्रेन अजीमाबाद एक्सप्रेस के रूप में रवाना होकर अगली सुबह 3:50 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी।
एसएसई दिलीप कुमार ने बताया कि इस ट्रेन का प्राइमरी मेंटेनेंस अहमदाबाद में किया जाएगा और इसका परिचालन 30 जुलाई तक किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि यात्रियों की संख्या अच्छी रही तो आगे इस सेवा को स्थायी रूप से भी जारी रखने की संभावना है।
पर्यटन नगरी राजगीर से पहली बार गुजरात तक सीधी ट्रेन सेवा की शुरुआत से न सिर्फ स्थानीय यात्रियों को बल्कि पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। खासकर उन यात्रियों के लिए यह सेवा राहत लेकर आई है जो अब तक राजगीर से अहमदाबाद जाने के लिए पटना या अन्य स्टेशनों का सहारा लेते थे।
यात्रियों की सुविधा के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो राजगीर को रेल मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।





