सड़क सुरक्षा का सख्त निर्देशः अब जब्त होंगे ऐसे ई-रिक्शा ऑटो वाहन
जिले की ट्रैफ़िक आबकारी शाखा ने आश्वासन दिया है कि हर अवैध ई-रिक्शा/ऑटो की मॉनिटरिंग की जाएगी। पहचान होल्डर मशीन (आईएचएम) आधारित मशीनों से रूट हिस्ट्री चेक कि जाएगी ताकि अवैध संचालन करने वाले चालकों का पता लगाया जा सके...

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। पूरे जिले में सड़क सुरक्षा का मसला विकराल रूप धारण कर लिया है। सफ़र पर निकले लोगों को मकाम तक पहुंचने में जितनी सहूलियत ई-रिक्शा और ऑटो देते हैं, उससे कहीं अधिक ख़तरा इन वाहनों के अनुचित संचालन में छिपा हुआ है। खासकर नाबालिग बच्चे बिना लाइसेंस के ई-रिक्शा व ऑटो चलाकर आम जनमानस की जान को खतरे में डाल रहे हैं। इस समस्या के नज़रअंदाज किए जाने पर परिवहन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसे अवैध वाहनों की जब्ती का आदेश जारी किया है।
पिछले तीन महीनों में जिले भर में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। परिवहन विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ जनवरी 2025 से मई 2025 के बीच नाबालिगों द्वारा चलाए गए ई-रिक्शा व ऑटो से कम से कम 28 दुर्घटनाएँ हुई हैं। इनमें चार में गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि दो लोगों की जान चली गई। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी आबादी तक यातायात व्यवस्था को गंभीर दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
नालंदा दर्पण संवाददाता ने जिले के ट्रैफ़िक पुलिस कप्तान से बात की, जिन्होंने बताया कि नाबालिगों को वाहन चलाने के पीछे उनका कमर्शियल लाभ है- रोज़ाना कचहरी मार्ग से लेकर रेलवे स्टेशन तक लोगों को सस्ते भाड़े पर पंहुचाना। परंतु इसका नतीजा जुर्माना भरने या लाइसेंस लेने से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है- सड़क पर जानमाल की हानि। इसलिए हम ऐसी हरकतों के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाएंगे।
परिवहन विभाग ने हाल ही में जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि जिले के सभी डीटीओ (जिला परिवहन अधिकारी) और उनकी टीमों को नाबालिगों द्वारा बिना लाइसेंस ई-रिक्शा/ऑटो चलाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। इस अभियान में ट्रैफ़िक पुलिस और स्थानीय पुलिस चौकियों की साझेदारी बढ़ाई जाएगी। संबंधित अधिकारियों को बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर तुरंत जुर्माना लगाने एवं वाहन जब्त करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद जिम्मेदार अभिभावकों को भी नोटिस भेजा जाएगा।
इस अभियान के दौरान अगर किसी नाबालिग को वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके माता-पिता या अभिभावकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। विभाग का कहना है कि “नाबालिगों को मोटर वाहन संचालन की मनाही होने पर भी यदि अभिभावक जानबूझकर उन्हें वाहन चलवाएंगे तो इसके लिए माता-पिता ही दोषी होंगे।”
अब हर जिले में कम से कम दस दिनों के लिए चेकपोस्ट लगाए जाएंगे। स्कूल/कॉलेजों के आसपास गुप्त तौर पर सतर्कता की स्थिति बनी रहेगी। जनता को जागरूक करने के लिए होर्डिंग्स, पेटिंग्स व चौपालें आयोजित की जाएंगी।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. विजयशंकर पांडेय का मानना है कि नाबालिगों द्वारा ई-रिक्शा चलाने की प्रक्रिया को बंद करना केवल वाहन जब्ती तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इस आयु वर्ग को स्थिर शिक्षा रोजगार के विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए। साथ ही सड़क सुरक्षा की शिक्षा स्कूलों-कॉलेजों में अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
उन्होंने आगे समझाया कि जब तक प्रभावित परिवारों की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरेगी, तब तक नाबालिग किसी न किसी तरह अवैध काम करके घर का खर्च चलाएंगे। इसलिए सरकार व गैर-सरकारी संस्थाओं को मिलकर कौशल विकास कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है। ताकि ये युवा सजग होकर वैध तौर पर वाहन चलाने का प्रमाणपत्र (लाइसेंस) ले सकें और सुरक्षित ड्राइविंग को प्राथमिकता दें।
बहरहाल, परिवहन विभाग के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने भी आश्वासन दिया है कि कार्रवाई में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी (बरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी) ने स्पष्ट किया कि नाबालिग अवैध वाहन परिचालन को रोकना हमारा मुख्य लक्ष्य है। हम न केवल वाहन जब्त करेंगे, बल्कि स्थानीय निकायों व पंचायतों के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों के उचित मार्गदर्शन के लिए प्रेरित करेंगे।







