सिविल सर्जन का औचक निरीक्षणः रहुई PHC के लापता 8 कर्मियों का नपना तय

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार के औचक निरीक्षण ने रहुई प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों में हड़कंप मचा दिया। जैसे ही सिविल सर्जन की गाड़ी अस्पताल परिसर में पहुंची, कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
निरीक्षण के दौरान उपस्थिति पंजी की जांच में आठ कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। जिनमें से कुछ कई दिनों से लगातार ड्यूटी से गायब थे। इस अनियमितता पर सिविल सर्जन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी अनुपस्थित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार ने सबसे पहले कर्मचारियों की उपस्थिति पंजी की जांच की। जांच में पाया गया कि कुल आठ कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित थे। इनमें लेखापाल कपिल कुमार सहित कई अन्य कर्मचारी शामिल थे, जो लगातार कई दिनों से ड्यूटी पर नहीं आ रहे थे।
अनुपस्थित कर्मचारियों में कपिल कुमार (लेखापाल)- 25, 26, 27 और 28 जून को अनुपस्थित, चंदन कुमार (पीएमडब्लयू)- 28 जून को अनुपस्थित, बसंत कुमार (फार्मासिस्ट)-27 और 28 जून को अनुपस्थित, अजेंद्र कुमार (लैब टेक्नीशियन)-27 और 28 जून को अनुपस्थित, प्रियंका कुमारी (एएनएम)- 27 और 28 जून को अनुपस्थित, प्रेमलता कुमारी- 28 जून को अनुपस्थित, चंद्रकांता कुमारी- 28 जून को अनुपस्थित, रीना कुमारी (जीएनएम)- 28 जून को अनुपस्थित पाए गए।
निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं पर सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि बिना वैध कारण के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डॉ. कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और कर्मचारियों की अनुपस्थिति से मरीजों को होने वाली असुविधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थानीय ग्रामीणों ने पहले भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों की नियमित अनुपस्थिति को लेकर कई बार नाराजगी जाहिर की थी। उनका कहना है कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे खासकर गरीब और ग्रामीण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हालांकि स्वास्थ्य केंद्र में इस तरह की अनियमितताएं पहली बार सामने नहीं आई हैं। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के औचक निरीक्षणों को नियमित रूप से किया जाना चाहिए। ताकि कर्मचारियों में जवाबदेही बनी रहे।










