DM के रडार पर दर्जनों पैक्स, चावल मिलों को चेतावनी, DCO को शोकॉज

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में सहकारी समितियों और चावल मिलों द्वारा कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की आपूर्ति में देरी और लापरवाही को लेकर जिलाधिकारी (DM) कुंदन कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उनकी अध्यक्षता में आयोजित एक समीक्षा बैठक में सीएमआर आपूर्ति की प्रगति की गहन समीक्षा की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
बैठक में पाया गया कि जिले की सहकारी समितियों (पैक्स/व्यापार मंडल) द्वारा क्रय किए गए धान के विरुद्ध केवल 85.24% सीएमआर की आपूर्ति राज्य खाद्य निगम को की गई है। लगभग 617 लॉट सीएमआर अभी भी समितियों पर बकाया है, जबकि विभाग ने 05 अगस्त 2025 तक 100% आपूर्ति का स्पष्ट निर्देश दिया था। यह अंतिम समयसीमा है, और भारत सरकार द्वारा इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने उन समितियों पर विशेष नाराजगी जताई, जिन्होंने सीएमआर आपूर्ति में रुचि नहीं दिखाई। ऐसी समितियों को चिह्नित कर उन्हें नोटिस जारी किया गया है। इनमें एक्सारा, पांचलोवा, नीरपुर, खैरा, सारे, केशोपुर, पोखरपुर, चेरो, सरबहदी, रायतर, सान्ध, ओपे, अंधना, शंकरडीह, बरदहा, नोवावा, दनियावा और पेंडापुर जैसी समितियां शामिल हैं, जिनके पास बकाया लॉट की संख्या अधिक है।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कई चावल मिलें अपने दैनिक लक्ष्य के अनुरूप सीएमआर आपूर्ति में विफल रही हैं। ऐसी मिलों को चिह्नित कर अंतिम चेतावनी दी गई है कि वे अपने रवैये में सुधार लाएं और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शत-प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करें। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि निर्धारित समयसीमा तक 100% सीएमआर आपूर्ति नहीं करने वाली समितियों के खिलाफ धान गबन का आरोप लगाते हुए नीलम पत्रवाद दायर किया जाएगा। साथ ही संबंधित पैक्स और मिलों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सहकारिता विभाग के सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दैनिक आधार पर प्रगति की समीक्षा करें और समितियों व मिलों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करें।
राज्य खाद्य निगम के नालंदा जिला प्रबंधक को भी निर्देश दिया गया कि वे मिल मालिकों को विभागीय निर्देशों का पालन करने और दैनिक लक्ष्य के अनुसार सीएमआर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करें।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और दोषी समितियों, मिलों या पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
सीएमआर आपूर्ति में अपेक्षाकृत कम प्रगति पर जिलाधिकारी ने क्षोभ व्यक्त करते हुए जिला सहकारिता पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है, और इसे प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), जिला प्रबंधक (राज्य खाद्य निगम), जिला सहकारिता पदाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।







