सांची स्तूप से दोगुनी ऊंची वैशाली बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय की जानें खासियतें

नालंदा दर्पण डेस्क। वैशाली वह ऐतिहासिक और पौराणिक भूमि है, जिसने विश्व को पहला गणतंत्र और नारी सशक्तीकरण की प्रेरणा दी। यहां एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को गौरवान्वित किया है। 29 जुलाई 2025 को बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का भव्य लोकार्पण हुआ, जिसमें विश्व के 15 देशों के बौद्ध धर्मावलंबी और भिक्षु शामिल हुए। यह स्मारक न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक बौद्ध मानचित्र पर वैशाली को एक नई पहचान भी देगा।

Vaishali Buddha Samyak Darshan Museum is twice as high as Sanchi Stupa, know its specialties
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बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप की ऊंचाई विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप से लगभग दोगुनी है। इसकी संरचना में राजस्थान के वंशी पहाड़पुर से लाए गए 42373 बलुआ पत्थरों का उपयोग किया गया है, जिन्हें टंग व ग्रुव तकनीक से जोड़ा गया। विशेष रूप से इस निर्माण में सीमेंट या किसी चिपकाने वाले पदार्थ का उपयोग नहीं हुआ, जो इसे प्राचीन स्थापत्य कला का एक अनूठा उदाहरण बनाता है। यह संरचना आधुनिक भूकंपरोधी तकनीकों से युक्त है, जो इसे हजारों वर्षों तक सुरक्षित रखने में सक्षम बनाती है।

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स्तूप के चारों ओर लिली पोंड, आकर्षक मूर्तियां और सुंदर बागवानी इसे और भी मनोरम बनाते हैं। ओडिशा के कुशल कारीगरों द्वारा निर्मित भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा इस स्मारक की विशेष पहचान है। इसके अलावा 32 रोशनदानों की व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि स्तूप में निरंतर प्रकाश और हवा का प्रवाह बना रहे।

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वैशाली का इतिहास विश्व में अनुपम है। यह वह भूमि है, जिसने विश्व को पहला गणतंत्र दिया और बौद्ध धर्म में नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया। बौद्ध संघ में पहली बार महिलाओं को शामिल करने की शुरुआत यहीं से हुई थी। बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप इस गौरवशाली इतिहास को और अधिक समृद्ध करता है।

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इस स्मारक के प्रथम तल पर भगवान बुद्ध का पावन अस्थि कलश स्थापित किया गया है, जो इसका प्रमुख आकर्षण है। यह अस्थि अवशेष छह स्थानों से प्राप्त हुआ है, जिसमें वैशाली के मड स्तूप से मिला अवशेष सबसे प्रामाणिक माना जाता है। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी पुस्तक में इस अस्थि अवशेष का उल्लेख किया है, जो इसकी ऐतिहासिकता को और पुष्ट करता है।

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इस स्मारक परिसर को पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी अनूठा बनाया गया है। यहां आने वाले पर्यटकों को सुखद अनुभव प्रदान करने के लिए परिसर में ध्यान केंद्र, पुस्तकालय, आगंतुक केंद्र, संग्रहालय ब्लॉक, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, 500 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र और पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। यह न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलेगा।

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बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का लोकार्पण बिहारवासियों के लिए गर्व का क्षण है। यह स्मारक न केवल वैशाली को वैश्विक बौद्ध तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि बिहार के पर्यटन, संस्कृति और अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगा। यह स्मारक बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक आध्यात्मिक केंद्र होने के साथ-साथ विश्व भर के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।

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नालंदा दर्पण की ओर से इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सभी बिहारवासियों को बधाई। यह स्मारक बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर और अधिक गौरव प्रदान करेगा।

Nalanda Darpan

नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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