Big decision of Bihar government : मुहाने नदी का मुंह नहीं खुलेगा, अब फल्गु-जलवार लिंक बनेगा समाधान !

हिलसा (नालंदा दर्पण)। हिलसा अनुमंडल क्षेत्र के किसानों के लिए वर्षों से अधूरी सिंचाई व्यवस्था को लेकर फल्गु-जलवार लिंक ( Big decision of Bihar government ) के रुप में एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। इस्लामपुर से सत्तरूढ़ जदयू विधायक रूहेल रंजन द्वारा विधानसभा में उठाए गए अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में जल संसाधन विभाग ने उदेरा स्थान बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की है।

जवाब में सरकार ने साफ किया कि फल्गु नदी से निकलने वाली मुहाने नदी का मुंह खोलना मौजूदा हालात में व्यावहारिक नहीं है, लेकिन किसानों को पानी देने के लिए वैकल्पिक और तकनीकी रूप से सुरक्षित योजना पर काम शुरू हो चुका है।

मुहाने नदी क्यों नहीं खुल सकती? सरकार के अनुसार फल्गु नदी पर निर्मित उदेरा स्थान बराज से ही पूरे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था संचालित होती है। इसी बराज के अपस्ट्रीम से महमूदा मुख्य नहर निकलती है, जो आगे जलवार नदी के मुहाने तक जाती है।

समस्या यह है कि मुहाने नदी का मुंह वर्षों से बंद पड़ा है और उसके निचले हिस्से में अब घनी आबादी बस चुकी है। ऐसे में नदी की खुदाई या मुंह खोलने से न सिर्फ सामाजिक-भौगोलिक संकट खड़ा होगा, बल्कि बराज में जल संचयन भी प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर नहरों के जरिए होने वाली मौजूदा सिंचाई पर पड़ेगा।

बन रहा है फल्गु-जलवार लिंक योजनाः सरकार ने स्पष्ट किया कि किसानों की जरूरतों को देखते हुए फल्गु-जलवार लिंक योजना तैयार की जा रही है। इस योजना के तहत उदेरा स्थान बराज के अपस्ट्रीम से निकलने वाली महमूदा मुख्य नहर के जरिए जलवार नदी में पानी पहुंचाया जाएगा।

विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) में जलवार नदी में लगभग 325 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का प्रस्ताव है। यह मात्रा क्षेत्र की कृषि जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई है।

किन गांवों को होगा सीधा लाभः योजना लागू होने पर निश्चलगंज बियर सहित ब्रह्मागामा, मूंदीपुर, ओंगारी, रसिसा और आसपास के कई गांवों के किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलने की संभावना है। इससे खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों की उत्पादकता भी बढ़ सकती है।

क्यों अहम है यह योजनाः विशेषज्ञों के मुताबिक नदी का मुंह खोलने जैसी जोखिम भरी योजना के बजाय लिंक कैनाल मॉडल अपनाना तकनीकी रूप से ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ समाधान है। इससे एक ओर बराज की सुरक्षा बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को नियमित जलापूर्ति भी सुनिश्चित होती है।

हालांकि, योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि DPR को कितनी जल्दी स्वीकृति मिलती है और ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन कितना पारदर्शी होता है।

किसानों की उम्मीदें फिर जगीं: क्षेत्र के किसान लंबे समय से स्थायी सिंचाई व्यवस्था की मांग करते आ रहे हैं। सरकार के इस जवाब के बाद उम्मीद जगी है कि यदि सभी स्वीकृतियां समय पर मिल गईं, तो आने वाले वर्षों में इस्लामपुर और आसपास के इलाकों की खेती की तस्वीर बदल सकती है। स्रोतः नालंदा दर्पण/ हिलसा रिपोर्टर

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