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Climate change: अब भारत के आकाश से लुप्त होगा सतरंगी इंद्रधनुष!

नालंदा दर्पण डेस्क। इंद्रधनुष प्रकृति का वह अनमोल तोहफा है, जो बारिश की बूंदों और सूरज की किरणों की मिलन से आसमान में सात रंगों का जादू बिखेरता है। हमेशा से मानव मन को आनंद और उम्मीद से भर देता है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक इंद्रधनुष को सौंदर्य, शांति और प्रकृति के चमत्कार का प्रतीक माना जाता रहा है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि यह रंगीन चमत्कार एक दिन हमसे छिन सकता है? हाल ही में किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत जैसे देशों में इंद्रधनुष की घटनाएं कम हो सकती हैं और शायद भविष्य में ये खूबसूरत नजारे दुर्लभ हो जाएं।

वैज्ञानिकों ने इंद्रधनुष के भविष्य को समझने के लिए एक अनोखा अध्ययन किया। उन्होंने विश्व भर में लोगों द्वारा खींची गई इंद्रधनुष की तस्वीरों का एक विशाल डेटाबेस तैयार किया और इसे एक अत्याधुनिक कंप्यूटर मॉडल के साथ जोड़ा। इस मॉडल को मौजूदा जलवायु आंकड़ों और भविष्य की तीन संभावित जलवायु परिस्थितियों के आधार पर परखा गया। परिणाम चौंकाने वाले थे।

वर्तमान में धरती के औसत स्थल क्षेत्रों पर साल में लगभग 117 दिन ऐसे होते हैं, जब इंद्रधनुष बनने की संभावना रहती है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश और बादलों के पैटर्न में हो रहे बदलाव इस संख्या को प्रभावित कर सकते हैं। अध्ययन के अनुसार साल 2100 तक दुनिया के 21-34% क्षेत्रों में इंद्रधनुष के दिन कम हो जाएंगे, जबकि 66-79% क्षेत्रों में इनकी संख्या बढ़ सकती है।

यह बदलाव क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग होगा। आर्कटिक और हिमालय जैसे ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों में इंद्रधनुष की घटनाएं सबसे ज्यादा बढ़ने की संभावना है। लेकिन इन क्षेत्रों में मानव आबादी न के बराबर है, इसलिए इस वृद्धि का आम लोगों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। दूसरी ओर भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों में जहां इंद्रधनुष लोगों के लिए खुशी और प्रेरणा का स्रोत रहे हैं, इनकी संख्या में कमी आ सकती है।

जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के पैटर्न में अनियमितता, सूखे की बढ़ती घटनाएं और बादलों के बनने की प्रक्रिया में बदलाव इंद्रधनुष की आवृत्ति को प्रभावित कर रहे हैं। विशेष रूप से गर्म और शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण इंद्रधनुष बनने की संभावना कम हो रही है।

इंद्रधनुष न तो अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करते हैं और न ही पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक हैं। फिर भी ये मानव जीवन में एक खास स्थान रखते हैं। इंद्रधनुष हमें प्रकृति से जोड़ता है, हमें आश्चर्य और खुशी का अनुभव कराता है। यह बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और कवियों की कलम में प्रेरणा लाता है। यह हमें याद दिलाता है कि प्रकृति में कितना कुछ है, जो हमें भावनात्मक रूप से समृद्ध करता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन न केवल हमारे पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह उन छोटे-छोटे अनुभवों को भी छीन रहा है, जो हमारे जीवन को अर्थ और सुंदरता प्रदान करते हैं। इंद्रधनुष का कम होना इस बात का प्रतीक है कि जलवायु परिवर्तन का असर केवल बड़े पैमाने पर ही नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन के छोटे-छोटे पलों पर भी पड़ रहा है।

इस अध्ययन ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया है। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना, वनों की रक्षा करना और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना कुछ ऐसे कदम हैं, जो इस दिशा में मदद कर सकते हैं।

साथ ही व्यक्तिगत स्तर पर भी हम अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए कदम उठा सकते हैं। जैसे कि- ऊर्जा का कम उपयोग, पुनर्चक्रण, और पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली अपनाना।

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