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प्रधानमंत्री आवास योजना में कमीशनखोरी, खानापूर्ति में जुटी डीएम की जांच टीम

हिलसा (नालंदा दर्पण)। नगर परिषद हिलसा के वार्ड संख्या 10 में प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा कमीशनखोरी का मामला इन दिनों इलाके में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में खुलेआम रिश्वत मांगने के आरोप सामने आने के बाद जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने 2 जनवरी को तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन कर मामले की जांच का आदेश दिया था। लेकिन आदेश के आठ दिन बाद भी जांच की रफ्तार और तरीके पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अब तक जांच टीम न तो संबंधित लाभुक के घर पहुंची है और न ही आवास निर्माण स्थल का भौतिक सत्यापन किया गया है। जबकि मामला प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण और संवेदनशील योजना से जुड़ा है, जिसमें सरकारी धन और गरीब लाभुकों के अधिकार सीधे जुड़े हुए हैं। इसके उलट जांच टीम द्वारा लाभुक को अनुमंडल कार्यालय बुलाकर बंद कमरे में पूछताछ की जा रही है और उसी आधार पर रिपोर्ट तैयार करने की तैयारी की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वीडियो साक्ष्य सार्वजनिक हो चुका है, तब जांच टीम का मौके पर न जाना और जमीन स्तर पर पड़ताल न करना, जांच को केवल औपचारिकता तक सीमित करने जैसा प्रतीत होता है। लोगों के बीच यह आशंका भी गहराती जा रही है कि कहीं दोषियों को बचाने की कोशिश तो नहीं हो रही है। वार्ड के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जांच निष्पक्ष हो और आवास स्थल पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए।

गठित जांच टीम में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी मधुकांत, बीडीओ अमर कुमार और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी रविशंकर कुमार शामिल हैं। गुरुवार को टीम ने लाभुक को अनुमंडल कार्यालय के एक कमरे में बुलाकर पूछताछ की। इस संबंध में पूछे जाने पर जांच टीम के सदस्यों ने बताया कि दोनों पक्षों से बारी-बारी से पूछताछ की जा रही है और सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।

हालांकि आमजन का सवाल यही है कि जब तक जांच टीम स्वयं मौके पर जाकर निर्माण की स्थिति, भुगतान प्रक्रिया और आरोपों की सच्चाई की जांच नहीं करती, तब तक रिपोर्ट पर भरोसा कैसे किया जाए। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वह जांच को वास्तव में पारदर्शी और निष्पक्ष बनाएगा या यह मामला भी फाइलों में सिमटकर रह जाएगा।

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