हिलसा (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल क्षेत्र में अवैध हथियारों के साथ नाबालिगों की गिरफ्तारी ने स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक परिवेश पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खोदागंज थाना पुलिस की सक्रियता से जहां एक बड़ी घटना टल गई, वहीं यह मामला क्षेत्र में तेजी से फैल रहे हथियारों के नेटवर्क और युवाओं के भटकाव की ओर भी इशारा करता है।
प्रभारी डीएसपी (सुरक्षा) रंजन कुमार के अनुसार पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि खोदागंज हाई स्कूल मैदान के समीप कुछ युवक ताड़ी के नशे में हथियार लहरा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी की।
खोजबीन के दौरान पुलिस को पास के एक सुनसान जंगलनुमा स्थान पर काले रंग की पैशन प्रो मोटरसाइकिल के साथ तीन संदिग्ध युवक खड़े मिले। संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उनकी निशानदेही पर एक पीपल के पेड़ के नीचे छिपाकर रखा गया देशी कट्टा बरामद किया गया। तीनों युवक नाबालिग पाए गए, जिन्हें निरुद्ध कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई है।
इसी क्रम में पुलिस को दूसरी सूचना चौरमा गांव से मिली, जहां आपसी विवाद के दौरान गोलीबारी की बात सामने आई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच के बाद मामले को सत्य पाया।
तलाशी अभियान के दौरान कौशलेंद्र कुमार के घर के पास नेवारी के पुंज में छुपाकर रखी गई एक देशी राइफल बरामद की गई। हालांकि पुलिस की मौजूदगी भांपते ही आरोपी मौके से फरार हो गया।
इस मामले में स्थानीय निवासी रंजीत प्रसाद के लिखित आवेदन के आधार पर खोदागंज थाना में आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें 10 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
प्रेस वार्ता में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अवैध हथियारों के स्रोत और नेटवर्क की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नाबालिगों तक ये हथियार कैसे पहुंचे और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतावनी भी है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध हथियारों की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है। बेरोजगारी और नशे की प्रवृत्ति युवाओं को अपराध की ओर धकेल रही है। नाबालिगों का अपराध में शामिल होना भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है।
स्थानीय प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर अपराध पर अंकुश लगाना, दूसरी ओर युवाओं को सही दिशा में ले जाना। स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता अभियान और समुदाय आधारित निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
यह घटना महज पुलिस कार्रवाई की खबर नहीं, बल्कि समाज के भीतर पनप रही उस खामोश समस्या का संकेत है, जहां नाबालिग भी हथियारों के संपर्क में आ रहे हैं। यदि समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह स्थिति और भयावह हो सकती है।




