राजगीर (नालंदा दर्पण)। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की यूजी सेमेस्टर-6 परीक्षा (UG Semester-6 Exams) में फर्जी परीक्षार्थियों के पकड़े जाने का सिलसिला लगातार जारी है। नालंदा जिले के राजगीर स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर महज तीन दिनों के भीतर 12 ‘मुन्ना भाई’ को दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते रंगेहाथ पकड़ा गया है। यह आंकड़ा न केवल परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने की कोशिशों को उजागर करता है, बल्कि प्रशासन की सख्ती और निगरानी तंत्र की सक्रियता को भी रेखांकित करता है।
तीन दिनों में 12 फर्जी परीक्षार्थी बेनकाबः सोमवार से शुरू हुई इस परीक्षा में पहले ही दिन 6 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए थे। दूसरे दिन यह संख्या 3 रही, जबकि बुधवार को प्रथम पाली में फिर 3 ‘मुन्ना भाई’ पकड़े गए। इस तरह कुल 12 मामलों का खुलासा हुआ है। सभी आरोपियों को तत्काल प्रभाव से परीक्षा से निष्कासित कर दिया गया।
जांच के दौरान इन फर्जी परीक्षार्थियों के दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई, जिससे उनकी पहचान उजागर हो गई। कई मामलों में फोटो और हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे थे, जबकि कुछ में एडमिट कार्ड और पहचान पत्र में स्पष्ट विसंगतियां सामने आईं।
केंद्र पर बढ़ाई गई सुरक्षा और निगरानीः राजकीय डिग्री महाविद्यालय को इस परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया है, जहां वर्धमान महावीर कॉलेज पावापुरी के छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं। लगातार सामने आ रहे फर्जीवाड़े के मामलों के बाद केंद्र प्रशासन ने जांच प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है।
प्राचार्य सह केंद्राधीक्षक डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता के अनुसार अब हर परीक्षार्थी की बहुस्तरीय जांच की जा रही है। प्रवेश द्वार पर ही पहचान पत्र, एडमिट कार्ड और फोटो का मिलान किया जा रहा है। संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत अलग से जांच की जा रही है।
क्यों बढ़ रहे हैं ‘मुन्ना भाई’ के मामले? शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगिता का बढ़ता दबाव, बेहतर अंक हासिल करने की होड़ और परीक्षा प्रणाली में मौजूद खामियां ऐसे मामलों को बढ़ावा देती हैं। कई बार अभ्यर्थी पैसे देकर किसी दूसरे व्यक्ति से परीक्षा दिलवाने का सहारा लेते हैं, जिसे फिल्मी भाषा में ‘मुन्ना भाई’ कहा जाता है।
हालांकि, हाल के वर्षों में डिजिटल एडमिट कार्ड, बायोमेट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी निगरानी जैसी व्यवस्थाओं के बावजूद ऐसे मामलों का सामने आना परीक्षा प्रणाली की चुनौतियों को उजागर करता है।
कदाचार से दूर रहने की अपीलः प्राचार्य डॉ. गुप्ता ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के कदाचार से दूर रहें। उन्होंने कहा कि परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन इसमें समाज और अभिभावकों का सहयोग भी आवश्यक है।
सख्ती बढ़ी तो सामने आए मामलेः विशेषज्ञों का मानना है कि यह जरूरी नहीं कि फर्जीवाड़ा अचानक बढ़ गया हो, बल्कि यह भी संभव है कि निगरानी व्यवस्था सख्त होने के कारण अब ऐसे मामले अधिक सामने आ रहे हैं। यह घटनाक्रम यह संकेत देता है कि यदि जांच प्रणाली मजबूत हो तो परीक्षा में होने वाले कदाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
बहरहाल, राजगीर परीक्षा केंद्र पर पकड़े गए 12 ‘मुन्ना भाई’ यह साफ संकेत देते हैं कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि प्रशासन की सख्ती और सतर्कता इस दिशा में सकारात्मक कदम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस सख्ती से कदाचार पर पूरी तरह लगाम लग पाती है या नहीं।






