बिहार शरीफ सदर अस्पतालः अवैध वसूली मामले में डीएम ने दिया एफआईआर दर्ज करने के आदेश, लेकिन…

बिहार शरीफ (नालंदा दर्पण)।  विगत दिनों नव नियोजित शिक्षकों के चिकित्सा प्रमाण पत्र बनाने के लिए सदर अस्पताल में अवैध रूप से राशि की वसूली किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल मामले पर संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी बिहार शरीफ एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बिहार शरीफ को मामले की जांच का निर्देश दिया था।

उसके बाद जांच समिति द्वारा अपने जांच रिपोर्ट में सुरेश कुमार चौधरी, कार्यालय परिचारी, सदर अस्पताल, बिहार शरीफ द्वारा अवैध रूप से राशि की वसूली किये जाने की पुष्टि की गई है।

जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिलाधिकारी ने सुरेश कुमार चौधरी, कार्यालय परिचारी के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया है।

दोषी कर्मी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही का भी संचालन सुनिश्चित करते हुए सेवा मुक्त करने की कार्रवाई का निर्देश भी दिया गया है।

इस प्रकरण में अन्य लोगों के संलिप्तता की संभावना की भी बात आई है, जिसकी पुष्टि इस जांच में नहीं हो पाई है।

अन्य संभावित संलिप्त लोगों की जांच हेतु जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता नालंदा की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय निगरानी धावा दल को जिम्मेदारी दी है।

हालांकि निगरानी समिति के जांच रिपोर्ट के आधार पर अन्य संलिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बही सदर अस्पताल के ब्लडबैक मे एक प्रसव पीड़ित मरीज को एचआईवी पोजेटिव  ब्लड चढाने और दो बालक को कोवैक्सीन लगाने के मामले ठंडे बस्ते मे चले गए।

जबकि ब्लड बैक के प्रभारी डाक्टर राम कुमार प्रसाद अभी तक ब्लड बैक के प्रभार में है तो वही कोवैक्सीन मामले की जाँच का जिम्मा डीडीसी को सौपा गया था, मगर आज तक दोनों मामले मे कोई कार्रवाई नहीं हुई हुई है।

जाहिर है कि बिहार शरीफ सदर अस्पताल में मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने वाले छोटे कार्मिकों पर कार्रवाई होती है, वहीं बडे ओहदा वाले पदाधिकारी को सिर्फ स्पाष्टीकरण करण देकर मामला ठंडे बस्ते मे रख दिया जाता है।

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