Homeनालंदानूरसराय प्रखंड के 5 प्राइमरी स्कूलों के हेडमास्टर पर गिरी गाज

नूरसराय प्रखंड के 5 प्राइमरी स्कूलों के हेडमास्टर पर गिरी गाज

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा विभाग द्वारा व्यवस्था में सुधार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन नूरसराय प्रखंड में जमीनी हकीकत विभाग की योजनाओं के ठीक उलट नजर आ रही है।

नूरसराय प्रखंड के विभिन्न सरकारी स्कूलों में माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक द्वारा 16 अक्टूबर को किए गए निरीक्षण में शैक्षणिक और संरचनात्मक कमियां उजागर हुईं। जिसके कारण कई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से जवाब-तलब किया गया है।

बुनियादी सुविधाओं में भारी कमी, सफाई और शौचालय की हालत खराबः निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नूरसराय प्रखंड के अधिकांश स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।

निरीक्षण में प्राथमिक विद्यालय प्रहलाद नगर, उच्च माध्यमिक विद्यालय कुंदी, प्राथमिक विद्यालय सुल्तानपुर, किशुनपुर और भागल बिगहा में कक्षा में ब्लैक बोर्ड का कालीकरण और विद्यालय भवनों का रंग रोगन भी ठीक से नहीं हुआ था।

कुछ स्कूलों के परिसर की स्थिति भी निराशाजनक थी। सफाई के नाम पर कक्षाओं से लेकर शौचालयों तक गंदगी पसरी हुई थी। जो छात्रों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

शिक्षण गुणवत्ता और होमवर्क प्रणाली पर सवालः निरीक्षण में यह भी खुलासा हुआ कि कुछ स्कूलों में बच्चों को होमवर्क ही नहीं दिया जा रहा था। वहीं जहां होमवर्क दिया गया था, वहां शिक्षकों द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गई थी। यह शिक्षा विभाग की नीतियों का स्पष्ट उल्लंघन है। जो बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है।

प्राथमिक विद्यालय भागल बिगहा में गैस पर नहीं बनाया जा रहा था एमडीएमः शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार मिड-डे मील (एमडीएम) का संचालन गैस पर होना चाहिए। ताकि बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिल सके। प्राथमिक विद्यालय भागल बिगहा में एमडीएम अब भी परंपरागत तरीके से बनाया जा रहा था।

शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, जारी हुआ स्पष्टीकरण का निर्देशः निरीक्षण के दौरान प्राथमिक विद्यालय प्रहलाद नगर के शिक्षक अनिल कुमार चौधरी बिना किसी सूचना के अनुपस्थित पाए गए। इस अनुशासनहीनता को लेकर उन्हें तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी का कड़ा रुखः जिन स्कूलों में कमियां पाई गईं। उनके प्रधानाध्यापकों को एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। जो भी शिक्षक या कर्मचारी इसमें लापरवाही करेगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आगे की कार्रवाईः निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने स्कूलों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए हैं। यदि प्रधानाध्यापक निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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