इन 2 हाई स्कूल में बनेगी अटल टिंकरिंग लैब, रोबोटिक्स से सीखेंगे छात्र

हिलसा (नालंदा दर्पण)। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता व आविष्कार की भावना विकसित करने के लिए नालंदा जिले के दो प्रमुख सरकारी स्कूलों उच्च विद्यालय बकौर (इसलामपुर) और आरडीएच प्लस टू हाई स्कूल (राजगीर)  में अटल टिंकरिंग लैब (ATL) स्थापित की जाएगी। यह पहल शिक्षा सत्र 2024-25 में की जा रही है, जिसमें बिहार के कुल 75 सरकारी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों का चयन किया गया है।

इन अटल टिंकरिंग लैब्स की स्थापना का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग और तकनीकी विषयों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर देना है।

इन स्कूलों में विद्यार्थियों को साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, थ्रीडी प्रिंटर, ओपन-सोर्स माइक्रो कंट्रोलर बोर्ड तथा सेंसर जैसे आधुनिक उपकरणों के माध्यम से पढ़ाई का अनुभव मिलेगा।

दरअसल अटल टिंकरिंग लैब एक ऐसा अत्याधुनिक शिक्षण केंद्र होता है, जहां छात्र सीखते हुए खुद करें की अवधारणा के तहत कार्य करते हैं। यहां उन्हें 3D प्रिंटर, IR सेंसर, अल्ट्रासोनिक सेंसर, रोबोटिक्स किट, कंप्यूटर और अनेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ प्रयोग करने का अवसर मिलता है। इससे उनकी कम्प्यूटेशनल सोच, डिजाइन माइंडसेट और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स विकसित होती हैं।

वहीं अटल लैब की स्थापना एवं संचालन के लिए केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित टीसीआईएल एजेंसी का चयन किया गया है। डीपीओ समग्र शिक्षा शाहनवाज ने जानकारी दी कि चयनित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को लैब स्थापना कार्य हेतु एजेंसी के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दे दिया गया है।

इससे पहले नालंदा जिले के सुभाष चन्द्र बोस हाई स्कूल (इसलामपुर) में लगभग 12 लाख रुपये की लागत से अटल टिंकरिंग लैब की स्थापना की गई थी। स्कूल के प्रधानाध्यापक सुनील कुमार के अनुसार उस लैब के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार क्षमता विकसित करने हेतु नियमित रूप से प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और विज्ञान प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता रहा है।

डीपीओ माध्यमिक शिक्षा अनिल कुमार का मानना है कि लैब के माध्यम से विद्यार्थी चैप्टर के विभिन्न पहलुओं को न सिर्फ समझेंगे, बल्कि उन्हें व्यवहार में लाना भी सीखेंगे। यह पहल बच्चों को भविष्य का आविष्कारक और इनोवेटर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

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