Home भ्रष्टाचार बेंच-डेस्क खरीद घोटाला: HM की शिकायत पर DDC ने गठित की जांच...

बेंच-डेस्क खरीद घोटाला: HM की शिकायत पर DDC ने गठित की जांच टीम

Bench-desk purchase scam: DDC formed investigation team on HM's complaint
Bench-desk purchase scam: DDC formed investigation team on HM's complaint

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के सरकारी स्कूलों में बेंच-डेस्क खरीद में भारी घपलेबाजी सामने आ रही है। उसी कड़ी में ताजा मामला रहुई प्रखंड के मध्य विद्यालय देकपूरा से सामने आया है। यहां बेंच-डेस्क आपूर्ति को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। हेडमास्टर (HM) ने खुद डीडीसी (DDC) को लिखित आवेदन देकर मामले की शिकायत की है।

उन्होंने कहा है कि उनके विद्यालय में केवल गौरी इंटर प्राइजेज दानापुर से 117 बेंच-डेस्क की आपूर्ति हुई है। जिसका भुगतान 5,83,830 रुपये किया गया। लेकिन उसी विद्यालय के नाम पर एक अन्य एजेंसी लता इंटर प्राइजेज बिहारशरीफ के नाम से भी 117 बेंच-डेस्क की आपूर्ति दिखाकर 5,84,995 रुपये का भुगतान कर दिया गया है।

हेडमास्टर ने स्पष्ट किया है कि गौरी इंटर प्राइजेज के अलावा किसी अन्य वेंडर से उन्होंने न तो बेंच-डेस्क लिया है और न ही किसी अन्य बिल पर हस्ताक्षर किए हैं।

बिहारशरीफ में बेंच-डेस्क की खरीद को लेकर पहले भी गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। शिक्षित युवाओं और सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी। कई जांच समितियां बनाई गईं और गड़बड़ियां सामने भी आईं। लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी रही।

इस बार मामला ज्यादा गंभीर है, क्योंकि गड़बड़ी का खुलासा खुद स्कूल के हेडमास्टर ने किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके स्कूल में दूसरी बार बेंच-डेस्क आया ही नहीं।

डीडीसी श्रीकांत कुण्लिक खांडेकर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में भूमि सुधार उप समाहर्ता, साइबर सेल के डीएसपी, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक और भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता शामिल हैं।

डीडीसी ने 31 जनवरी को सभी संबंधित पक्षों को साक्ष्य सहित अपने कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। परिवादी हेडमास्टर, डीईओ और अन्य संबंधित लोग इस सुनवाई में अपनी बात रखेंगे।

इस मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेंच-डेस्क की आपूर्ति के नाम पर बार-बार गड़बड़ी होना सरकारी धन की बर्बादी का स्पष्ट उदाहरण है। क्या इस बार जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या मामला फिर से दबा दिया जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा।

बेंच-डेस्क खरीद का यह मामला सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का उदाहरण है। हेडमास्टर की शिकायत ने न केवल सिस्टम में खामियों को उजागर किया है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में हो रहे घोटालों की ओर ध्यान खींचा है। अब देखना यह है कि जांच में क्या नतीजे सामने आते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version