शिक्षा मित्र बहाली में 19 साल बाद बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, जानें अजूबा मामला 

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड में 19 साल पुराना फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, जब शिक्षा मित्र बहाली प्रक्रिया में विभागीय रोस्टर का उल्लंघन कर अतिपिछड़ा वर्ग की महिला कोटे में पिछड़ा वर्ग की महिला का चयन कर लिया गया था। यह खुलासा तब हुआ, जब नूरसराय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) द्वारा मध्य विद्यालय पारसी की शिक्षिका अंचला कुमारी से स्पष्टीकरण की मांग की गई।

विभागीय जांच के दौरान सामने आया कि 2005 में हुई इस नियुक्ति में पंचायत सचिव और मुखिया की मिलीभगत से यह अनियमितता हुई थी। उस समय दो पद खाली थे। जिनमें एक सामान्य वर्ग के लिए और दूसरा अतिपिछड़ा वर्ग की महिला कोटे के लिए था। सामान्य वर्ग में सही चयन करते हुए क्रांति कुमार को नियुक्त किया गया। लेकिन अतिपिछड़ा वर्ग की महिला के स्थान पर अंचला कुमारी, जो पिछड़ा वर्ग से हैं, उसका चयन कर लिया गया।

बीईओ द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अंचला कुमारी का चयन विभागीय नियमों और दस्तावेज़ों के विपरीत किया गया था। उनसे दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण के साथ-साथ शैक्षणिक, प्रशैक्षणिक और जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

इस प्रकरण से जुड़े लोगों का कहना है कि तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के दबाव में मामला सालों से दबा पड़ा था, लेकिन अब जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के नूरसराय में पदभार संभालने के बाद से प्रभावित लोगों को न्याय की उम्मीद जागी है। इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद मामले की पुनः जांच की मांग तेजी से उठ रही है। जिससे फर्जीवाड़ा के कई नए मामले का खुलासा होना तय है।

मुख्य बिंदु:

  • 19 साल बाद शिक्षा मित्र बहाली में फर्जीवाड़ा उजागर
  • 2005 में अतिपिछड़ा वर्ग की महिला कोटे में पिछड़ा वर्ग की महिला की नियुक्ति
  • पंचायत सचिव और मुखिया की मिलीभगत से हुई अनियमितता
  • नई जांच से प्रभावित लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद

वेशक यह मामला शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करता है, जो वर्षों से दबा हुआ था। अब देखना होगा कि जांच प्रक्रिया से क्या निष्कर्ष निकलते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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