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भाई ने रची खौफनाक साजिश, आंख फोड़ और जनांग काट की बेरहम हत्या

यह जघन्य वारदात एक बार फिर साबित करती है कि जब इंसान पर संपत्ति का लालच हावी हो जाता है, तो खून के रिश्ते भी दरक जाते हैं। बालकिशुन पाल की हत्या न केवल नालंदा जिले, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि धन और ज़मीन की लालसा किस हद तक इंसान को हैवान बना सकती है...

राजगीर (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के बेन थाना क्षेत्र में एक खौफनाक पारिवारिक हत्या का खुलासा हुआ है, जिसने इंसानी रिश्तों को शर्मसार कर दिया। लगभग तीन महीने पहले 19 फरवरी को हुई बुजुर्ग बालकिशुन पाल की बेरहमी से हत्या के रहस्य से शुक्रवार को पर्दा उठ गया।

लकैयापर गांव के 60 वर्षीय बालकिशुन पाल की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उसके ही सगे भाई ने की थी- वो भी संपत्ति के बंटवारे को लेकर। पुलिस की जांच में सामने आया है कि बालकिशुन पाल अपनी पूरी संपत्ति अपनी बेटियों के नाम करना चाहता था, जिससे उसका भाई देवन पाल बुरी तरह नाराज़ था।

पुलिस जांच के अनुसार देवन पाल ने पड़ोसी धन्नु पाल, अपने बेटे सत्येंद्र पाल और गांव के ही दिनेश प्रसाद के साथ मिलकर यह खौफनाक साजिश रची। 19 फरवरी को जब बालकिशुन पाल बाजार से घर लौट रहे थे, तभी पचहतरपर गांव के पास घात लगाए बैठे इन चारों ने उन पर हमला कर दिया। पहले उसे बेरहमी से पीटा गया, फिर उसकी आंख फोड़ दी गई और तेज धारदार हथियार से उसके जनांग को काट डाला गया।

घटना के बाद अज्ञात के विरुद्ध मामला दर्ज कर पुलिस ने अनुसंधान शुरू किया। एसडीपीओ राजगीर सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। जिसने सटीक सूचना के आधार पर धन्नु पाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान धन्नु ने पूरे षड्यंत्र का खुलासा कर दिया।

धन्नु की निशानदेही पर पुलिस ने देवन पाल और दिनेश प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि सत्येंद्र पाल अब भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है।

इस सनसनीखेज हत्याकांड का पर्दाफाश करने में पुलिस की संयुक्त टीम ने अहम भूमिका निभाई। छापेमारी में राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह, सर्किल इंस्पेक्टर संजय कुमार, डीआईयू प्रभारी आलोक कुमार, बेन थानाध्यक्ष रवि कुमार, नालंदा थानाध्यक्ष निशि कुमार और छबीलापुर थानाध्यक्ष मुरली मनोहर आजाद सहित बेन थाना के सशस्त्र बल के जवान शामिल रहे।

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