चंडी नगर पंचायत में सैरात बंदोबस्ती राशि में कटौती से पारदर्शिता पर उठे सवाल

चंडी (नालंदा दर्पण)। चंडी नगर पंचायत में सैरात बंदोबस्ती को लेकर लिया गया ताजा प्रशासनिक निर्णय स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। नगर पंचायत प्रशासन ने सैरात बंदोबस्ती की निर्धारित राशि में कमी करते हुए इसे 12 लाख 65 हजार रुपये तय किया है।

इस निर्णय को एक ओर जहां व्यावहारिक और राजस्व संरक्षण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके दूरगामी प्रभावों और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल भी उठने लगे हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पूर्व में निर्धारित राशि अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण बंदोबस्ती की प्रक्रिया बार-बार बाधित हो रही थी। इच्छुक अभ्यर्थियों की सीमित भागीदारी और टेंडर प्रक्रिया में अपेक्षित प्रतिस्पर्धा नहीं बनने से नगर पंचायत के राजस्व संग्रह पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका गहराने लगी थी। इसी पृष्ठभूमि में यह निर्णय लिया गया।

नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. अनूपा कुमारी  की दलील है कि पूर्व निर्धारित राशि पर टेंडर प्रक्रिया सफल नहीं हो पा रही थी। इससे आय के महत्वपूर्ण स्रोत पर असर पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि राशि में कमी का उद्देश्य अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करना है, ताकि बंदोबस्ती समय पर और सफलतापूर्वक पूरी हो सके।

यह भी कहना है कि नई दर लागू होने के बावजूद जब तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक पूर्व में वसूली कर रहे व्यक्ति द्वारा ही राजस्व संग्रह का कार्य जारी रहेगा। इससे नगर पंचायत की आय में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी और प्रशासनिक व्यवस्था भी सुचारू बनी रहेगी।

सूत्रों के अनुसार यह टेंडर रंजीत कुमार उर्फ बबलू महतो से संबंधित है, जिस कारण इस फैसले को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। कई लोगों का मानना है कि राशि में कमी से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और प्रक्रिया में तेजी आएगी, जबकि कुछ लोगों ने यह सवाल उठाया है कि आखिर पहले तय की गई राशि व्यावहारिक क्यों नहीं थी।

विश्लेषकों का मानना है कि सैरात बंदोबस्ती नगर पंचायतों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण साधन होता है। इससे प्राप्त राजस्व का उपयोग सफाई, सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाओं के विकास में किया जाता है। ऐसे में बंदोबस्ती प्रक्रिया में देरी सीधे तौर पर विकास कार्यों को प्रभावित कर सकती है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन को इस प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की पक्षपात या अनियमितता की आशंका न रहे। लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि नई राशि पर टेंडर प्रक्रिया कितनी शीघ्र और निष्पक्ष तरीके से पूरी होती है।

नगर पंचायत प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराई जाएगी। टेंडर फाइनल होते ही नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी और चयनित अभ्यर्थी को सैरात बंदोबस्ती का कार्य सौंप दिया जाएगा।

फिलहाल, चंडी नगर पंचायत का यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक बदलाव भर नहीं, बल्कि स्थानीय राजस्व प्रबंधन और शासन व्यवस्था की कार्यशैली पर भी महत्वपूर्ण सवाल और संभावनाएं दोनों खड़ा करता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कदम नगर पंचायत के राजस्व को कितना सुदृढ़ करता है और जनता को इसका कितना लाभ मिल पाता है।

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