Home अपराध हिलसा में कोचिंग संचालक बेलगाम, यहां आपसी वर्चस्व में गोलीबारी आम बात

हिलसा में कोचिंग संचालक बेलगाम, यहां आपसी वर्चस्व में गोलीबारी आम बात

Coaching operators are unruly in Hilsa, firing for supremacy is common here.

हिलसा (नालंदा दर्पण संवाददाता)। नालंदा जिले का हिलसा नगर कभी अपनी शांतिपूर्ण माहौल और ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के लिए जाना जाता था। लेकिन आज कोचिंग माफिया और अपराधियों के वर्चस्व की लड़ाई का अखाड़ा बन चुका हैं। खासकर सूर्य मंदिर तालाब के उत्तर हिलसा थाना के ठीक पीछे वाली तंग गली इन दिनों गोलीबारी का पर्याय बन गई हैं। सुबह-सुबह कोचिंग जाने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के बीच बदमाश खुलेआम कट्टा लहराते हैं, फब्तियां कसते हैं और बात-बात पर गोली चला देते हैं।Coaching operators are unruly in Hilsa firing for supremacy is common here 1

बीते सुबह कोचिंग खुलने से ठीक पहले अचानक ताबड़तोड़ गोलियां चलने की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। कोचिंग जा रहे सैकड़ों छात्र-छात्राओं में भगदड़ मच गई। लड़कियां चीखती-चिल्लाती इधर-उधर भागीं। कई छात्र तो सदमे में जमीन पर ही बैठ गए। स्थानीय लोगों ने घटनास्थल से एक जिंदा कारतूस का खोखा बरामद किया हैं। सबसे हैंरान करने वाली बात यह हैं कि गोली की आवाज थाना परिसर तक साफ-साफ सुनाई दी, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची।

स्थानीय निवासी संजय कुमार ने बताया कि यहां रोज ही ऐसा होता हैं। कभी दो कोचिंग वालों के बीच वर्चस्व की लड़ाई, कभी पुरानी रंजिश। कट्टा निकालना और हवाई फायरिंग करना यहां चाय पीने जितना आम हो गया हैं। लड़कियां सबसे ज्यादा डरी हुई हैं। कई छात्राओं ने तो डर के मारे कोचिंग ही छोड़ दी हैं।

हिलसा में अनुमंडल मुख्यालय होने के कारण दर्जनों बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान हैं। कई गलियां तो कोटा की याद दिलाती हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह हैं कि इनमें से अधिकांश कोचिंग बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम 2010 के बावजूद जिला शिक्षा विभाग ने पिछले कई सालों से एक भी कोचिंग का रजिस्ट्रेशन नहीं किया हैं। नतीजा यह कि कोचिंग मालिक मनमानी पर उतर आए हैं।

एक ही इमारत के तंग-अंधेरे कमरों में तीन-तीन कोचिंग चल रही हैं। न लाइट की समुचित व्यवस्था, न शौचालय, न पीने का पानी। लड़कियों के लिए अलग शौचालय तो दूर की बात हैं। गर्मी में पंखे तक नहीं चलते। छात्रों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंस कर बैठाया जाता हैं। कई कोचिंग संचालक खुद स्थानीय दबंग और अपराधियों से सांठ-गांठ रखते हैं। यही वजह हैं कि उनके इर्द-गिर्द गुंडे मंडराते रहते हैं।

इस  इलाके की महिलाओं और कोचिंग जाने वाली छात्राओं का कहना हैं कि बदमाशों द्वारा छेड़खानी और अश्लील फब्तियां कसना रोज की बात हो गई हैं। एक छात्रा ने बताया कि हम लोग डर के मारे ग्रुप में ही आते-जाते हैं। फिर भी रास्ता रोककर बदमाश गंदी-गंदी बातें करते हैं। कई बार तो पीछा भी करते हैं। शिकायत करने पुलिस कहती हैं कि सबूत दो। जबकि कई कोचिंग में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

हिलसा थानाध्यक्ष अभिजीत कुमार ने फोन पर कहा कि हां, फायरिंग की सूचना मिली थी। हमने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं। एक शख्स फायरिंग करता दिख रहा हैं। उसकी शिनाख्त की जा रही हैं। अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई हैं, जल्द ही कार्रवाई होगी।

लेकिन स्थानीय लोगों का कहना हैं कि पिछले छह महीने में इस गली में दर्जनों बार फायरिंग हो चुकी हैं, लेकिन एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ। लोग सवाल उठा रहे हैं कि थाना के ठीक पीछे दिनदहाड़े गोली चल रही हैं और पुलिस को कुछ नहीं दिखता?

लोगों ने मांग की हैं कि थाने के पीछे वाली गली में तुरंत स्थायी पुलिस गश्ती लगाई जाए। सभी अवैध कोचिंगों पर ताला लगे और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो। पिछले सभी फायरिंग मामलों के आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किए जाएं।

लोगों ने यह भी चेतावनी दी हैं कि अगर बदमाशों पर लगाम नहीं लगाई गई और कोचिंगों का रजिस्ट्रेशन व सुरक्षा मानकों की जांच नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अब देखना यह हैं कि हिलसा नगर पुलिस और प्रशासन इस गंभीर मामले में कब संज्ञान लेती हैं या फिर किसी दिन कोई बड़ी वारदात होने का इंतजार किया जाएगा?

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