कोरोना काल में बंद राजगीर-हावड़ा फास्ट पैसेंजर ट्रेन की बहाली की मांग तेज

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल राजगीर से हावड़ा तक की यात्रा को सुगम बनाने वाली राजगीर-हावड़ा-राजगीर फास्ट पैसेंजर ट्रेन (53043/53044) की बहाली की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। यह ट्रेन कभी स्थानीय निवासियों और कोलकाता जाने वाले यात्रियों के लिए जीवनरेखा थी। लेकिन कोरोना काल में 15 जनवरी 2020 को बंद कर दी गई थी। तब से नालंदा जिले के लोग और यात्री इसकी बहाली की मांग कर रहे हैं।

हावड़ा-राजगीर फास्ट पैसेंजर (53043) कुल 656 किलोमीटर की दूरी को 28 किमी/घंटा की औसत गति से तय करती थी, जिसमें कुल यात्रा समय लगभग 23 घंटे 45 मिनट था। यह ट्रेन सेंथिया (SNT), सकरीगली जं. (SLJ) और कजरा (KJH) जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों से होकर गुजरती थी, जिससे बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच छोटे-बड़े स्टेशनों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। यह ट्रेन न केवल यात्रियों के लिए किफायती थी, बल्कि व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और छात्रों के लिए भी सुविधाजनक थी।

कोरोना महामारी के दौरान इस ट्रेन को बंद करने का निर्णय लिया गया, जिसके बाद से स्थानीय लोगों को कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने में काफी असुविधा हो रही है। वैकल्पिक ट्रेनें, जैसे बुद्धपूर्णिमा एक्सप्रेस (14223/14224), राजगीर और गया के बीच चलती हैं, लेकिन ये हावड़ा तक की सीधी कनेक्टिविटी प्रदान नहीं करतीं।

नालंदा के सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने संसद में इस ट्रेन की बहाली की मांग को मजबूती से उठाया है। उन्होंने न केवल राजगीर-हावड़ा फास्ट पैसेंजर (53043/44) को फिर से शुरू करने की बात कही, बल्कि राजगीर से फतुहा वाया बिहारशरीफ-चण्डी-रुखाई-दनियावां होते हुए मेमू ट्रेन को पटना या दानापुर तक विस्तारित करने की भी मांग की। इसके अलावा उन्होंने नालंदा जिले के सभी रेलवे प्लेटफार्मों का स्तर ऊंचा करने, रोशनी, पानी और साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था की मांग भी की है।

हाल ही में रेलवे ने यात्रियों की मांग को आंशिक रूप से पूरा करते हुए राजगीर से हावड़ा तक एक विशेष ट्रेन शुरू की है। यह ट्रेन राजगीर से मोकामा तक चलती है, जहां से इसका नंबर बदलकर हावड़ा तक जाती है। यह विशेष ट्रेन दिसंबर 2024 तक त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। हालांकि यह स्थायी समाधान नहीं है और लोग चाहते हैं कि फास्ट पैसेंजर ट्रेन (53043/44) को स्थायी रूप से बहाल किया जाए।

रेलवे सूत्रों के अनुसार इस ट्रेन की बहाली पर विचार चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन की बहाली के लिए तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।

राजगीर, जो नालंदा जिले का एक प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थल है, न केवल बिहार बल्कि पूरे देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहाँ की ऐतिहासिक नालंदा यूनिवर्सिटी, विश्व शांति स्तूप और गर्म पानी के झरने इसे विशेष बनाते हैं। हावड़ा जैसे महानगर से सीधी रेल कनेक्टिविटी न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि पर्यटकों और व्यापारियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

राजगीर-हावड़ा फास्ट पैसेंजर ट्रेन (53043/44) की बहाली की मांग नालंदा जिले के लोगों की एक जायज मांग है। यह ट्रेन न केवल आवागमन को सुगम बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगी। रेलवे से उम्मीद है कि वह इस मांग को गंभीरता से लेगा और जल्द ही इस ट्रेन को फिर से शुरू करने की घोषणा करेगा। तब तक यात्रियों को विशेष ट्रेनों और अन्य वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना होगा।

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