दीदी की रसोईः पुलिस केंद्र में स्वच्छ और पौष्टिक भोजन की नई पहल

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिला पुलिस केंद्र में एक अनूठी पहल की शुरुआत हुई, जब दीदी की रसोई का उद्घाटन किया गया। इस रसोई का शुभारंभ जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) भारत सोनी ने किया, जिन्होंने इस अवसर को पुलिस कर्मियों की सुविधाओं में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

यह रसोई जीविका समूह की महिलाओं द्वारा संचालित की जाएगी, जो प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे महिला और पुरुष पुलिस कर्मियों के लिए स्वच्छ, पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन तैयार करेगी।
उद्घाटन समारोह में पुलिस केंद्र में उत्साह का माहौल था। एसपी भारत सोनी ने रसोई का फीता काटकर इसकी शुरुआत की और जीविका दीदियों के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों का स्वास्थ्य और मनोबल उनके कर्तव्यों को निभाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दीदी की रसोई के माध्यम से हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे जवान स्वच्छ और पौष्टिक भोजन प्राप्त करें, जो उनकी कार्यक्षमता को और बेहतर बनाएगा।
एसपी ने आगे बताया कि यह रसोई पुलिस विभाग की उन पहलों का हिस्सा है, जो जवानों की सुविधाओं और कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीविका दीदियों द्वारा संचालित यह रसोई न केवल गुणवत्तापूर्ण भोजन प्रदान करेगी, बल्कि स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान देगी।
रसोई का संचालन करने वाली जीविका समूह की महिलाओं ने इस पहल को अपने लिए एक बड़ा अवसर बताया।
समूह की सदस्य राधा देवी ने कहा कि हमारे लिए यह गर्व की बात है कि हम पुलिस कर्मियों के लिए भोजन तैयार करेंगे। हम साफ-सफाई और गुणवत्ता का पूरा ध्यान रख रहे हैं, ताकि जवानों को घर जैसा स्वाद और पोषण मिले। रसोई में तैयार होने वाले भोजन में स्थानीय स्वाद को प्राथमिकता दी जाएगी। जिसमें दाल, चावल, रोटी, मौसमी सब्जियां और पारंपरिक बिहारी व्यंजन शामिल होंगे।
रसोई में स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। जीविका समूह की एक अन्य सदस्य सुनीता कुमारी ने बताया कि हमें खाना बनाने से पहले और बाद में साफ-सफाई के नियमों का पालन करना सिखाया गया है। हम चाहते हैं कि हमारे बनाए भोजन से जवानों को ताकत और खुशी दोनों मिले।
पुलिस केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे कर्मियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। प्रशिक्षु कांस्टेबल अमित कुमार ने कहा कि पहले हमें बाहर से खाना मंगवाना पड़ता था, जो कई बार समय पर नहीं मिलता था। अब दीदी की रसोई से हमें ताजा और स्वादिष्ट भोजन मिलेगा, जो हमारे प्रशिक्षण के लिए बहुत जरूरी है।
बता दें कि दीदी की रसोई न केवल एक बड़ी सुविधा है, बल्कि यह जीविका समूह की महिलाओं के लिए भी सशक्तिकरण का एक माध्यम है। इस पहल के माध्यम से स्थानीय महिलाओं को रोजगार का अवसर मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।





