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सिलाव कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ DM ने की सख्त कार्रवाई, जानें डिटेल

राजगीर (नालंदा दर्पण)। राजगीर अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के न्यायालय में सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने के गंभीर मामले में सिलाव कार्यपालक पदाधिकारी सुश्री भावना के खिलाफ जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है।

इस संबंध में जिला प्रशासन ने सुश्री भावना को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही उनके वेतन भुगतान को तत्काल प्रभाव से अवरुद्ध कर दिया गया है। यह कार्रवाई बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम-2015 के तहत दायर परिवाद पत्रों के निष्पादन में लापरवाही को लेकर की गई है।

बताया जाता है कि दिनांक 23 जून 2025 को नालंदा जिले में आयोजित जिला स्तरीय समन्वय बैठक में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम के अंतर्गत दायर परिवाद पत्रों के निष्पादन की स्थिति और जिले की प्रगति की समीक्षा की गई।

इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि अनन्य संख्या-527310127032504155 के तहत राजगीर के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के न्यायालय में 16 जून 2025 को हुई सुनवाई में सुश्री भावना, कार्यपालक पदाधिकारी सिलाव, लोक प्राधिकार के रूप में उपस्थित नहीं हुईं।

अनुसार अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजगीर ने बताया कि सुश्री भावना को सुनवाई की सूचना दी गई थी। लेकिन वह न तो स्वयं उपस्थित हुईं और न ही उनके प्रतिनिधि के रूप में कोई अन्य पदाधिकारी या कर्मचारी मौजूद रहा। यह लापरवाही जिला प्रशासन की साप्ताहिक समन्वय बैठकों में बार-बार दिए गए निर्देशों की अवहेलना का गंभीर मामला माना गया है।

जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने इस मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए सुश्री भावना को तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है-

सेवा में टूट का आधार: सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने की तारीख 16 जून 2025 को उनकी सेवा में टूट क्यों न माना जाए?

सेवापुस्त में प्रविष्टि: उनकी अनुपस्थिति को उनके सेवापुस्त में दर्ज क्यों न किया जाए?

प्रशासी कार्रवाई की अनुशंसा: उनके खिलाफ अग्रेतर कार्रवाई के लिए प्रशासी विभाग को अनुशंसा सहित प्रतिवेदन क्यों न भेजा जाए?

जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जब तक सुश्री भावना संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करतीं, तब तक उनका वेतन भुगतान अवरुद्ध रहेगा। यह कदम न केवल प्रशासनिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए उठाया गया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने के लिए है कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निवारण हो।

बता दें कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम-2015 को 5 जून 2016 से पूरे राज्य में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों का 60 कार्य दिवसों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करना है।

इस कानून के तहत शिकायतकर्ता और संबंधित लोक प्राधिकार के बीच आमने-सामने सुनवाई की व्यवस्था है। ताकि पारदर्शी और त्वरित समाधान हो सके।

यदि कोई पक्ष निर्णय से असंतुष्ट होता है तो वह अपील दायर कर सकता है। यह अधिनियम सरकारी योजनाओं, सेवाओं और नियमों की अवहेलना से संबंधित शिकायतों के लिए प्रभावी मंच प्रदान करता है।

जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि लोक शिकायत निवारण प्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निवारण हमारी प्राथमिकता है। इस तरह की लापरवाही न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी कमजोर करती है।

अब सुश्री भावना को जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के तहत जल्द से जल्द अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं हुआ तो उनके खिलाफ अग्रेतर कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले ने नालंदा जिले में प्रशासनिक जवाबदेही और लोक शिकायत निवारण प्रणाली की प्रभावशीलता पर चर्चा को तेज कर दिया है।

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