“डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय राजगीर समाज के वंचित वर्ग की छात्राओं के लिए एक उम्मीद की किरण है। यह विद्यालय न केवल शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला रहा है, बल्कि तकनीकी और वैज्ञानिक शिक्षा के माध्यम से छात्राओं को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है…
राजगीर (नालंदा दर्पण)। लंबे समय से समाज में यह धारणा रही है कि केवल निजी विद्यालय ही आधुनिक सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में सक्षम हैं। लेकिन डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय राजगीर ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। यह विद्यालय न केवल निजी विद्यालयों को कड़ी टक्कर दे रहा है, बल्कि कई मामलों में उनसे कहीं आगे निकल चुका है। यह विद्यालय समाज के वंचित वर्ग की छात्राओं को निःशुल्क उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करके शिक्षा में समानता और उत्कृष्टता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
अत्याधुनिक सुविधाओं का केंद्रः डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय में उपलब्ध सुविधाएं किसी भी निजी विद्यालय से कम नहीं हैं। यहां आधुनिक स्कूल भवन के साथ-साथ छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है, जो छात्राओं को सुरक्षित और आरामदायक वातावरण प्रदान करता है। विद्यालय में हाईटेक आईसीटी लैब, रोबोटिक्स लैब, डिजिटल लैब और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाएं हैं, जो छात्राओं को तकनीकी शिक्षा में पारंगत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं वैज्ञानिक शिक्षा को और भी रोचक और प्रभावी बनाती हैं।
विद्यालय के सभी कक्षाओं में डिजिटल बोर्ड और स्मार्ट क्लासेस की सुविधा है, जो शिक्षण को इंटरैक्टिव और आधुनिक बनाती है। इन सुविधाओं का लाभ निजी विद्यालयों में भारी शुल्क चुकाने के बाद ही मिलता है। लेकिन इस विद्यालय में ये सभी सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं। यह न केवल शिक्षा में समानता को बढ़ावा देता है, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग की छात्राओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करता है।
तकनीकी शिक्षा का नया आयामः विद्यालय में स्थापित आईसीटी लैब और कंप्यूटर लैब में छात्राएं कोडिंग, प्रोग्रामिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे कौशलों को सीख रही हैं। इंटरनेट की सुविधा के साथ वे डिजिटल शिक्षा के माध्यम से नवीनतम तकनीकों से परिचित हो रही हैं। डिजिटल लैब क्लासेस के जरिए छात्राएं देश के किसी भी कोने से विशेषज्ञों और शिक्षकों से सीधा संवाद कर सकती हैं। जिससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवीनतम जानकारी प्राप्त होती है।
रोबोटिक्स लैब छात्राओं में नवाचार और विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित कर रहा है। यहां वे रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर रही हैं। यह सुविधा उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है।
वैज्ञानिक शिक्षा को नया स्वरूपः विद्यालय की भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान प्रयोगशालाएं अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं। इन प्रयोगशालाओं में प्रोजेक्टर और स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से जटिल वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल और सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इससे छात्राओं को वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने में आसानी होती है और उनकी रुचि विज्ञान के प्रति बढ़ती है।
समग्र विकास पर जोरः डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है। यहां छात्राओं के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। विद्यालय में क्विज, पेंटिंग, निबंध लेखन, भाषण और काव्य पाठ जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जो छात्राओं में प्रतिस्पर्धी भावना को जागृत करता है। इसके अलावा खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं, जो छात्राओं के शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक हैं।
कमजोर छात्राओं के लिए अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाती हैं। ताकि वे पाठ्यक्रम में पीछे न रहें। विद्यालय की लाइब्रेरी में पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ अतिरिक्त सामग्री भी उपलब्ध है, जहां छात्राएं खाली समय में ज्ञानवर्धन कर सकती हैं।
स्वच्छता और सुंदरता का प्रतीकः विद्यालय का परिसर इतना सुंदर और स्वच्छ है कि यह हर किसी को आकर्षित करता है। स्वच्छता के प्रति विशेष ध्यान देने के लिए विद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव रंजन को सम्मानित भी किया जा चुका है। कक्षाओं में उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर, बिजली और पंखों की सुविधा उपलब्ध है, जो छात्राओं को आरामदायक शिक्षण वातावरण प्रदान करती है।
सूबे का आदर्श बनने की ओर अग्रसरः डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय अब केवल राजगीर या नालंदा जिले तक सीमित नहीं है। यह बिहार के सरकारी शिक्षा क्षेत्र में एक आदर्श (मॉडल) विद्यालय के रूप में उभर रहा है। यह विद्यालय साबित करता है कि यदि सरकारी विद्यालयों को सही दिशा, नेतृत्व और संसाधन मिलें तो वे निजी विद्यालयों को पीछे छोड़ सकते हैं। यह परिवर्तन न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि सरकारी शिक्षा प्रणाली में विश्वास को भी मजबूत करता है।
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