पुलिस-प्रशासन की मिलिभगत से बालू माफियाओं के हौसले बुलंद

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। इन दिनों समूचे नालंदा जिले में अवैध बालू का कारोबार चरम पर हैं। शहर से लेकर गांव तक की सड़कों किनारे अवैध बालू की खरीद-बिक्री चल रही है। रास्ते पर फैले बालू से प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। सूर्य उगने से पहले ही बालू कारोबारी सक्रिय हो जाते हैं और निर्धारित स्थानों पर बालू गिराकर चले जाते हैं। पुलिस और प्रशासन के लोग इसे रोकने के बजाय प्रायः कमाई करने में मग्न है।

वहीं हर दिन बालू का अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग हो रहा है। बिना नंबर वाले ट्रैक्टर से अहले सुबह और देर शाम बालू की अवैध ढुलाई होती है। अवैध बालू के कारोबार से ग्रामीण सड़कें और शहरों की गलियां पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं। जहां-तहां नाले के ढक्कन आये दिन बालू लदे ट्रैक्टर से टूट रहे हैं।

बालू लदे ट्रैक्टर के आगे-पीछे बाइक से उसके निगरानी के लिए कारोबारी चलते हैं। जैसे कहीं पुलिस वाहन आते-जाते दिखता है, वैसे ही बाइक सवार कारोबारी बालू लदे वाहन चालक को मोबाइल से उसकी सूचना दे देते हैं, जिससे अवैध बालू लदा वाहन चालक कहीं कोई ग्रामीण सड़क में अपने को छिपा लेता है या फिर पुलिस से सौदा पटा लेता है।

ओवरलोडिंग बालू लदे वाहन से ग्रामीण क्षेत्रों के पुल पर भी खतरा मंडरा रहा है। रसुला से खेदुबिगहा जाने वाले रोड में कई पुल हैं, जो गत दो वर्षों से ओवरलोडिंग वाहन से दो पुल लगभग बर्बाद हो गया हैं। इसी मार्ग में आगे चलकर सात पुल हैं, जिसमें ओवरलोडिंग वाहन से तीन की स्थिति खराब हो गयी हैं।

लगभग यहीं कमोबेश हाल हर क्षेत्र का है। बालू माफियाओं के आगे प्रशासनिक सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया है। सड़कों से लेकर गलियों में बालू माफियाओं की पहुंच है। प्रशासन से कोई शिकायत करने पर भी बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई होने से पहले माफियाओं तक शिकायकर्ता की जानकारी पहुंच जाती है।

यहीं कारण है कि शहर के किसी न किसी चौक-चौराहे पर प्रतिदिन अ सुबह बालू गिरता हैं। इसमें अधिकांश बालू ढोने वाले ट्रैक्टर का नंबर नहीं होता है। बालू गिराने वाली एजेंसी के पास लाइसेंस तक नहीं होता है।

वहीं जिला खनन पदाधिकारी मुकेश कुमार का कहना है कि खनन विभाग की ओर से अवैध बालू कारोबारियों के खिलाफ नियमित छापेमारी की जाती है। कोई व्यक्ति अवैध बालू ढुलाई, खनन से लेकर ओवरलोडिंग जैसी सूचना देते हैं तो उनकी सूचना गुप्त रखी जाती है। साथ ही सूचना के आलोक में विभाग अपने स्तर से सत्यापन कर छापेमारी करती है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की गलियों में अवैध बालू कारोबारियों की सूचना बहुत कम मिलती है। इसलिए उसपर पूरी तरह नकेल नहीं लग पा रही है।

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