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    Thursday, May 30, 2024
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       अब सरकारी स्कूलों के कक्षा नौवीं में आसान हुआ नामांकन

      बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा विभाग के द्वारा आठवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं को अपने ही पंचायत के संबद्ध उच्च विद्यालय में ही 9वीं कक्षा में नामांकन कराने की बाध्यता में अब ढील दी गई है।

      नालंदा जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुसार जिले के छात्र-छात्राओं को नामांकन मे हो रही कठिनाइयों को देखते हुए शिक्षा विभाग द्वारा स्थानांतरण प्रमाण पत्र देने के साथ-साथ 9वीं कक्षा में नामांकन कराने के नियमों में सुधार किया गया है। इससे छात्र-छात्राओं को नामांकन में सुविधा होगी।

      नए नियमों के अनुसार जिस पंचायत या नगर निकाय में दो या दो से अधिक उच्च विद्यालय है, वहां के छात्र-छात्राएं इस पंचायत या नगर निकाय के किसी भी विद्यालय में नामांकन करा सकते हैं।

      संबंधित पंचायत के प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालय के छात्र-छात्राओं को भी यह सुविधा मिलेगी। इसी आधार पर निजी विद्यालयों के विद्यार्थी भी 9वीं कक्षा में अपने पंचायत के किसी भी विद्यालय में नामांकन करा सकते हैं।

      इसी प्रकार यदि पंचायत या नगर निकाय के मध्य विद्यालय के छात्र-छात्राएं संबद्ध किए गए उच्च विद्यालय के निवास स्थल से अधिक दूरी रहने के कारण वह दूर के विद्यालय को छोड़कर निकट के पर कार्यालय नालन्दा विद्यालय में अपना नामांकन करा सकते हैं।

      वैसे मध्य विद्यालय, प्रस्वीकृत संस्कृत विद्यालय तथा अन्य संबद्धता प्राप्त विद्यालय जो किसी उच्च विद्यालय से संबद्ध नहीं किये गये है, वैसे विद्यालयों के छात्र-छात्राएं अपने पंचायत अथवा निकटतम अन्य वार्ड, पंचायत अथवा प्रखंड के अंतर्गत उच्च विद्यालयों में नामांकन करा सकते हैं।

      जिस पंचायत में कन्या उच्च विद्यालय हो तो उस पंचायत की आठवीं उत्तीर्ण छात्राओं का नामांकन सर्वप्रथम उसी कन्या उच्च विद्यालय में लिया जाएगा। सीट भरने की स्थिति में ही छात्राओं को किसी अन्य विद्यालय में नामांकन कराने की अनुमति प्रदान की जाएगी।

      इसी प्रकार यदि किसी पंचायत अथवा नगर निकाय में सिर्फ कन्या उच्च विद्यालय ही स्थित हो तो वहां के छात्र सुविधा अनुसार निकट के किसी भी वार्ड, पंचायत अथवा प्रखंड के उच्च विद्यालय में नामांकन करा सकते हैं।

      बकौल जिला शिक्षा पदाधिकारी, सभी विद्यालयों को विद्यालय में मौजूद आधारभूत संरचना को ध्यान में रखते हुए ही नामांकन लेना है। किसी भी विद्यालय को बहुत अधिक संख्या में छात्र-छात्राओं को नामांकन नहीं लेना है। बल्कि समानुपातिक अनुपात में सभी माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं का नामांकन होना आवश्यक है।

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