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12 साल बाद भी बिहारशरीफ कारगिल बस स्टैंड की नहीं लौटी रौनक

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहारशरीफ नगर का सबसे भव्य और आधुनिक कारगिल बस स्टैंड निर्माण काल के 12 वर्षों में भी यहां रौनक नहीं लौटी है। यह बस स्टैंड देखरेख के अभाव में बदहाल होते जा रहा है। मुख्य द्वार तक टूट-टूट कर गिरने लगे हैं। यहां-जहां-तहां बड़े-बड़े गड्ढे हो गये हैं। गडढेनुमा स्टैंड में आने-जाने वाले यात्रियों को फजीहत होती है।

प्रशासनिक अनदेखी के कारण यहां निर्माण एजेंसियों के सामग्रियों का भंडारगृह बनता जा रहा है। कुछ कारोबारी बालू- गिट्टी, पाइप जैसे निर्माण सामग्रियों का भंडारण कर स्टैंड से ही बिक्री करते हैं। कुछ निर्माण एजेंसी यहां अपनी सामग्रियों को भंडारण और कर्मचारियों को ठहरने की व्यवस्था किये हुए हैं।

इस बस स्टैंड से निकलने वाले गंदा पानी का निकास मार्ग लगभग बंद सा हो गया है। जिसके कारण हल्की बारिश होने पर बस स्टैंड के कई हिस्से में गंदा पानी महीने तक जमा रहता है।

देखरेख के अभाव में आसपास के कुछ लोग यहां सुबह-शाम शौचालय कर गंदा फैला देते हैं। बालू-गिट्टी लदे ट्रक और ट्रैक्टर के आने-जाने से स्टैंड में जहां-तहां बड़े-बड़े गड्ढे हो गये हैं। इन गड्ढों के कारण देर शाम आने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। यहां लगाये गये गई लाइट खराब हो गये हैं, कुछ ठीक हैं, जो दिन में भी जलते रहते हैं।

हालांकि महानगरों दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे कारगिल बस स्टैंड में शेड बनाये गये थे, जिसमें यात्रियों को बस पर चढ़ने के लिए सुविधा है। फिर भी प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार हो रहे यह स्टैंड अपना रौनक खोने लगा है।

वर्तमान में यहां से सिर्फ राजगीर और गया रुट के लिए बस खुलती हैं। वर्ष 2012 में उद्घाटन के दौरान घोषणा की गयी थी कि नवादा, वारिसलीगंज, कतरीसराय, अलीगंज, शेखपुरा मार्ग की सभी बसें यहीं से खुलेंगी, जो अब तक नहीं खुली। नतीजनत अब तक इस स्टैंड से निर्धारित सभी रूटों के लिए बसों के परिचालन नहीं होने के कारण कोई भी यहां रौनक नहीं आया है।

फिलहाल कारगिल स्टैंड से सुबह चार बजे से रात दस बजे तक राजगीर और गया के करीब डेढ़ दर्जन से अधिक बसें खुलती हैं। इससे करीब सैकड़ों यात्रियों को प्रतिदिन आना-जाना लगा रहता है। हालांकि यहां सुरक्षा और रात्रि विश्राम के लिए रैन बसेरा की उत्तम व्यवस्था है। स्टैंड परिसर में बने भवन के ऊपरी तल पर पुलिस बल और निचले तले में देर सबेर आने वाले आगंतुओं के लिए रैन बसेरा काम कर रहा है। इस स्टैंड की देखरेख और यहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की सारी जिम्मेवारी नगर निगम की है।

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Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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