तथ्य जांच नीति
Fact Check Policy – तथ्य जांच नीति – नालंदा दर्पण (nalandadarpan.com): नालंदा दर्पण का उद्देश्य पाठकों तक सटीक, संतुलित और ज़िम्मेदार जानकारी पहुँचाना है। इस Fact-Check Policy का मक़सद यह बताना है कि हम अफ़वाह, फेक न्यूज़ और भ्रामक दावों की जांच कैसे करते हैं, किन मानकों का पालन करते हैं, और पाठकों की क्या भूमिका है। यह नीति हमारी संपादकीय टीम, रिपोर्टरों, लेखकों और सभी सहयोगियों पर लागू होती है।
1. Fact-Check की ज़रूरत क्यों?
डिजिटल दौर में सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और इंटरनेट पर फर्जी खबरें, आधी-अधूरी जानकारी, एडिटेड फोटो/वीडियो और अफ़वाहें तेज़ी से फैलती हैं, जो:
- समाज में भ्रम और घबराहट पैदा कर सकती हैं
- समुदायों के बीच तनाव बढ़ा सकती हैं
- लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं पर भरोसा कम कर सकती हैं
इसीलिए नालंदा दर्पण, जहाँ संभव हो, महत्वपूर्ण और संदिग्ध दावों की तथ्य-जांच (Fact-Checking) कर पाठकों के सामने स्पष्ट स्थिति रखने की कोशिश करता है।
2. हम किस प्रकार के दावों की Fact-Check करते हैं?
हम मुख्य रूप से उन दावों की Fact-Check को प्राथमिकता देते हैं जो:
- सार्वजनिक हित से जुड़े हों
- जैसे: सरकारी योजनाएँ, चुनाव, नीतियाँ, स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा, स्थानीय प्रशासन आदि।
- तेज़ी से वायरल हो रहे हों
- सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, फेसबुक, X (Twitter), इंस्टाग्राम, यूट्यूब आदि पर तेज़ी से फैल रहे दावे, तस्वीरें या वीडियो।
- संवेदनशील मुद्दों से जुड़े हों
- धर्म, जाति, समुदाय, महिला/बच्चों से जुड़ी संवेदनशील खबरें, अपराध या हिंसा से संबंधित सामग्री।
- खुलकर झूठे/संशयास्पद लगते हों
- अतिरंजित, सनसनीखेज, बहुत ही अविश्वसनीय या बिना स्रोत के साझा किए गए दावे।
हर वायरल मैसेज या अफ़वाह की Fact-Check करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता; इसलिए हम सार्वजनिक प्रभाव, गंभीरता और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर मामले चुनते हैं।
3. Fact-Check प्रक्रिया (हम कैसे जांच करते हैं?)
हमारी Fact-Check प्रक्रिया broadly इन चरणों पर आधारित रहती है:
3.1. दावा (Claim) की पहचान
- पहले हम स्पष्ट रूप से यह निर्धारित करते हैं कि दावा क्या है –
उदाहरण: - “सरकार ने फलाँ योजना बंद कर दी है…”
- “यह फोटो फलाँ जगह के दंगे की है…”
- “फलाँ नेता ने यह बयान दिया…”
- यदि दावा अस्पष्ट हो, तो उसे स्पष्ट शब्दों में फ्रेम किया जाता है।
3.2. स्रोत और संदर्भ की जाँच
- यह पता लगाया जाता है कि दावा कहां से शुरू हुआ:
- सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सएप मैसेज, वीडियो, फ़ोटो, ब्लॉग, प्रेस स्टेटमेंट इत्यादि।
- मूल (original) कंटेंट, पूरा वीडियो, पूरी फोटो या बयान ढूँढने की कोशिश की जाती है, ताकि कट-पेस्ट या एडिटेड संदर्भ से बचा जा सके।
3.3. आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापन
हम जहाँ संभव हो, इनसे पुष्टि करने की कोशिश करते हैं:
- आधिकारिक वेबसाइटें (सरकारी पोर्टल, विभागीय साइट, संस्थान)
- अधिकृत प्रेस रिलीज़, नोटिस, आदेश या RTI/दस्तावेज़
- जिम्मेदार अधिकारी/प्रवक्ता से लिखित/ऑडियो/वीडियो बयान
- विश्वसनीय समाचार एजेंसियाँ और स्थापित मीडिया संस्थान
- मौक़े पर मौजूद विश्वसनीय प्रत्यक्षदर्शी (Eyewitness)
- सार्वजनिक डेटा, रिपोर्ट, शोध, कोर्ट आदेश या अन्य प्रमाणित रिकॉर्ड
इमेज/वीडियो से जुड़े मामलों में जहाँ आवश्यक हो, हम:
- रिवर्स इमेज सर्च (reverse image search)
- मेटाडाटा/टाइमस्टैम्प (जहाँ उपलब्ध हो)
- अलग-अलग फ्रेम/एंगल से तुलना
का उपयोग कर यह देखने की कोशिश करते हैं कि तस्वीर/वीडियो किस जगह और किस समय का है।
3.4. विशेषज्ञों से परामर्श (जहाँ ज़रूरी हो)
तकनीकी या विशिष्ट क्षेत्रों (जैसे स्वास्थ्य, कानून, अर्थव्यवस्था, साइंस/टेक आदि) से जुड़े दावों पर हम:
- सम्बंधित क्षेत्र के योग्य विशेषज्ञों, डॉक्टरों, वकीलों, अर्थशास्त्रियों, शोधकर्ताओं, या प्रोफेशनल्स से बात करने की कोशिश करते हैं और उनका पक्ष शामिल करते हैं।
3.5. निष्कर्ष तैयार करना और रेटिंग देना
तथ्यों की जाँच के बाद, हम दावा और निष्कर्ष को सरल भाषा में समझाते हैं और जहाँ उपयुक्त हो, उसे इस तरह वर्गीकृत करते हैं:
- सही (True) – जब दावा बड़े स्तर पर तथ्यात्मक रूप से सही हो।
- आंशिक रूप से सही / भ्रामक (Partly True / Misleading) – जब दावा कुछ हद तक सही हो, लेकिन संदर्भ बदला गया हो, डेटा अधूरा हो या प्रस्तुति भ्रामक हो।
- गलत (False) – जब दावा तथ्यात्मक रूप से गलत या झूठा हो।
- पुष्टि नहीं हो सकी (Unverifiable / Not Proven) – जब उपलब्ध स्रोतों/साक्ष्यों से स्पष्ट निष्कर्ष संभव न हो।
जहाँ संभव हो, हम पाठकों को मूल दस्तावेज़ों, आधिकारिक स्रोतों या अतिरिक्त संदर्भों के लिंक भी उपलब्ध कराते हैं।
4. Fact-Check में हमारी सीमाएँ (Limitations)
हालाँकि हमारी कोशिश रहती है कि हर जांच:
- निष्पक्ष,
- तथ्यपरक,
- और विस्तृत हो,
फिर भी कुछ व्यावहारिक सीमाएँ हो सकती हैं:
- समय और संसाधन की सीमा– हर वायरल दावे को तुरंत और पूर्ण विस्तार से जांचना संभव नहीं होता।
- डेटा की उपलब्धता– कभी-कभी आधिकारिक डेटा या प्राथमिक स्रोत सार्वजनिक नहीं होते या समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते।
- कानूनी/सुरक्षा बाधाएँ– कुछ मामलों में कानूनी या सुरक्षा कारणों से कुछ जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
ऐसे मामलों में, जहाँ स्पष्ट निष्कर्ष संभव नहीं, हम यह साफ़-साफ़ बताते हैं कि दावा न तो पूर्ण रूप से सत्यापित हो पाया, न ही पूरी तरह झूठ साबित किया जा सका।
5. निष्पक्षता और स्वतंत्रता (Impartiality & Independence)
- Fact-Check प्रक्रिया किसी भी राजनीतिक दल, संगठन, विज्ञापनदाता या बाहरी प्रभाव से स्वतंत्र रखी जाती है।
- हमारा लक्ष्य किसी व्यक्ति, समूह या विचारधारा को टारगेट करना नहीं, बल्कि तथ्य और झूठ के बीच फ़र्क स्पष्ट करना है।
- हम Fact-Check प्रकाशित करते समय भाषा को शांत, तर्कसंगत और सभ्य रखने की कोशिश करते हैं।
6. त्रुटि की स्थिति में सुधार (Corrections in Fact-Checks)
यदि किसी Fact-Check में बाद में यह पता चलता है कि:
- कोई नया, विश्वसनीय तथ्य सामने आया है,
- कोई डेटा गलत पढ़ा/समझा गया,
- या हमारी रिपोर्ट में तथ्यात्मक गलती रह गई,
तो हम:
- संबंधित Fact-Check को अपडेट (Update) कर सकते हैं,
- स्पष्ट रूप से यह उल्लेख कर सकते हैं कि कब, क्यों और क्या सुधार किया गया,
- और आवश्यक हो तो अलग से Correction/Clarification नोट भी जोड़ सकते हैं।
पाठकों से निवेदन है कि यदि उन्हें हमारे किसी Fact-Check में गलती/चूक लगे, तो वे हमें स्रोत/प्रमाण सहित सूचित करें।
7. पाठकों की भूमिका- आप कैसे मदद कर सकते हैं?
आप इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आप:
- यदि कोई वायरल मैसेज, तस्वीर, वीडियो या दावा आपको संदिग्ध लगे तो
- उसका स्क्रीनशॉट,
- लिंक,
- या पूरा मैसेज/कंटेंट
हमें भेजकर Fact-Check के लिए सुझाव दे सकते हैं।
- आप Fact-Check सुझाव भेजते समय यह जानकारी दें:
- आपने यह मैसेज/कंटेंट कहाँ देखा (WhatsApp, Facebook, X, Instagram, YouTube आदि)
- यह कब और किसके द्वारा भेजा/शेयर किया गया (जहाँ संभव हो)
Fact-Check सुझाव भेजने के लिए:
- ईमेल: nalandadarpan.com@gmail.com
- Subject में लिखें:
Fact-Check Request – [संक्षिप्त विषय]
हम हर सुझाव को देखने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर सुझाव पर रिपोर्ट/लेख प्रकाशित करना संभव नहीं होता। फिर भी, जहाँ सार्वजनिक हित और गंभीरता दिखती है, वहाँ Fact-Check को प्राथमिकता दी जाती है।
8. पारदर्शिता (Transparency)
Fact-Check करते समय हम यथासंभव:
- अपने स्रोत और संदर्भ (जहाँ सुरक्षित/कानूनी रूप से संभव हो) साझा करने की कोशिश करते हैं,
- यह बताते हैं कि हमने कौन-कौन सी वेबसाइटें, दस्तावेज़, रिपोर्ट या आधिकारिक बयान देखे,
- और किस आधार पर निष्कर्ष तक पहुँचे।
यदि किसी जानकारी को सुरक्षा, गोपनीयता या कानूनी कारणों से सार्वजनिक नहीं किया जा सकता तो हम इसका उल्लेख सामान्य रूप से कर सकते हैं।
9. वित्तीय और व्यावसायिक प्रभाव से दूरी
- विज्ञापन या व्यवसायिक सहयोग हमारी Fact-Check प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करने चाहिए।
- किसी विज्ञापनदाता, प्रायोजक या सहयोगी संस्था से जुड़े दावों पर Fact-Check करते समय भी हम उसी मानक का पालन करने का प्रयास करते हैं, जो अन्य सभी मामलों में करते हैं।
10. नीति में बदलाव (Changes to This Fact-Check Policy)
जैसे-जैसे:
- मीडिया परिदृश्य बदलता है,
- टेक्नोलॉजी और फेक न्यूज़ के तरीके बदलते हैं,
- और कानून/नियम अपडेट होते हैं,
नालंदा दर्पण अपनी Fact Check Policy में भी समय–समय पर बदलाव/अपडेट कर सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव के बाद यह पेज अपडेट किया जाएगा, और आवश्यकता हो तो संबंधित सूचना भी प्रकाशित की जा सकती है।
11. हमसे संपर्क कैसे करें?
यदि इस Fact-Check Policy से संबंधित आपके मन में:
- कोई सवाल,
- सुझाव,
- आपत्ति,
- या Fact-Check से संबंधित कोई विशेष चिंता हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं:
- ईमेल: nalandadarpan.com@gmail.com
- मोबाइल: 07004868273
नोट: नालंदा दर्पण, सत्य के अधिकतम नज़दीक पहुँचने की लगातार कोशिश करता है; फिर भी हम खुद को अचूक नहीं मानते। आपकी सजगता, प्रतिक्रिया और भागीदारी ही हमारी Fact-Check प्रक्रिया को और मजबूत बना सकती है।