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इस्लामपुर में जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती, प्रभात फेरी से लेकर संकल्प सभा तक गूंजा सामाजिक चेतना

अति पिछड़ा अनुसूचित समाज ने जननायक के विचारों को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक नेताओं ने याद दिलाया संघर्ष और योगदान

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर नगर बाजार स्थित नेताजी श्री सुभाष उच्च माध्यमिक विद्यालय का प्रांगण रविवार को सामाजिक चेतना, सम्मान और संघर्ष की यादों का साक्षी बना, जब अति पिछड़ा अनुसूचित जाति जनजाति विकास मंच के तत्वावधान में भारत रत्न स्वर्गीय जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती पूरे श्रद्धा, उत्साह और जनभागीदारी के साथ मनाई गई। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों को याद करने और आगे बढ़ाने का संकल्प था। karpoori thakur jayanti islampur 1

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह प्रभात फेरी से हुई, जिसने पूरे नगर को जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों से जोड़ दिया। प्रभात फेरी मलिक सराय से प्रारंभ होकर बी-थ्री मुहानी होते हुए समारोह स्थल नेताजी श्री सुभाष उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण तक पहुंची।

हाथों में तख्तियां, बैनर और पोस्टर लिए युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने जननायक कर्पूरी ठाकुर अमर रहें, सामाजिक न्याय जिंदाबाद जैसे नारों के साथ नगर का वातावरण पूरी तरह जननायकमय कर दिया। प्रभात फेरी के दौरान लोगों में खासा उत्साह देखा गया और राह चलते नागरिक भी इस ऐतिहासिक व्यक्तित्व को नमन करते नजर आए।

समारोह की अध्यक्षता मंच के संयोजक धर्मेंद्र चौहान ने की, जबकि मंच का उद्घाटन पूर्व एमएलसी एवं नाई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आजाद गांधी तथा स्थानीय विधायक रूहेल रंजन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मंच पर कई सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक व्यक्तित्व मौजूद थे, जिन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन, संघर्ष और उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक फैसलों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

सभा को संबोधित करते हुए जिला बीस सूत्री सदस्य धर्मेंद्र चौहान ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनाना अति पिछड़ा समाज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक न्याय के सच्चे प्रहरी थे।

उन्होंने अति पिछड़ों के मान-सम्मान और अधिकारों के लिए पूरी जिंदगी संघर्ष किया। उन्होंने अति पिछड़ा वर्ग को अलग पहचान देकर मुख्यधारा से जोड़ने का साहसिक कदम उठाया, जिसका परिणाम आज पूरे बिहार में दिखाई देता है।

धर्मेंद्र चौहान ने कहा कि आज बिहार सरकार की नौकरियों में निम्न वर्ग के कर्मचारियों से लेकर उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों तक, अति पिछड़ा समाज के लोग अपनी भूमिका निभा रहे हैं। यह सब जननायक कर्पूरी ठाकुर की दूरदर्शी नीतियों का ही परिणाम है।

उन्होंने आगे कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में अति पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की परंपरा भी उन्हीं की सोच का विस्तार है, जिसके कारण आज अति पिछड़ा समाज के लोग वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर की तर्ज पर चलकर ही कोई राजनीतिक नेता वास्तव में महान बन सकता है। ईमानदारी, सादगी और जनसेवा के बल पर ही कर्पूरी ठाकुर को जननायक की उपाधि मिली और अंततः भारत रत्न जैसा सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ।

उन्होंने आह्वान किया कि उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना आज अति पिछड़ा समाज का परम धर्म है। उनकी जयंती पर केवल माल्यार्पण कर देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात कर समाज में समानता और न्याय के लिए काम करना जरूरी है।

इस अवसर पर यह भी घोषणा की गई कि आगामी 17 फरवरी 2026 को मंच की ओर से जननायक कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि भी भव्य रूप से मनाई जाएगी। इस दौरान सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर विशेष परिचर्चा और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद एवं अत्यंत पिछड़ा चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. भीम सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कर्पूरी ठाकुर का जीवन आज की राजनीति के लिए एक आदर्श है।

उन्होंने कहा कि आज जब राजनीति में स्वार्थ और दिखावे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, ऐसे समय में कर्पूरी ठाकुर जैसे नेताओं को याद करना और उनके सिद्धांतों को अपनाना और भी जरूरी हो जाता है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं और सामाजिक बदलाव के वाहक बनें।

पूर्व एमएलसी आजाद गांधी ने अपने वक्तव्य में कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर ने यह साबित किया कि सत्ता का उद्देश्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और यही कारण है कि आज भी वे हर वर्ग के दिलों में जीवित हैं।

विधायक रूहेल रंजन ने कहा कि इस्लामपुर की धरती पर इस तरह का आयोजन यह संदेश देता है कि समाज अब जागरूक हो रहा है और अपने अधिकारों के प्रति सजग है। उन्होंने मंच के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम में संतोष कुमार चंद्रवंशी, रंजीत चौधरी, पप्पू दास, संजीत रजक, राकेश पाल, जनार्दन चौधरी, मंटू चंद्रवंशी, पवन शर्मा, डॉ. अनवर साहब, नीरज चंद्रवंशी, विश्राम बिंद, विजय विश्वकर्मा, कृष्ण पासवान, सुभाष मिस्त्री, छोटे चौरसिया, मनोज चौधरी, मनवा देवी, सनी मालाकार, नगीना पंडित, मुखिया धर्मेंद्र चौहान, भरत चौहान, राम प्रवेश बिंद, शिवकांत शर्मा, पप्पू चंद्रवंशी, जीत चंद्रवंशी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक मौजूद थे।

सभा का संचालन संतोष कुमार चंद्रवंशी ने किया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को अनुशासित और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह संदेश दिया गया कि जननायक कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाना ही इस तरह के आयोजनों का असली उद्देश्य है।

कुल मिलाकर इस्लामपुर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक जयंती समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और सम्मान की लड़ाई को आगे बढ़ाने का एक मजबूत संकल्प था, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि जननायक कर्पूरी ठाकुर का विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है जितना उनके जीवनकाल में था।

(इस्लामपुर से नालंदा दर्पण के लिए रामकुमार वर्मा की रिपोर्ट)

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