दहेज हत्याकांड के 6 साल बाद जिंदा मिली विवाहिता, जानें बड़ा रोचक मामला

दहेज हत्याकांड का यह मामला न केवल कानून व्यवस्था के लिए, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी कई सवाल खड़े करता है। दहेज हत्या के नाम पर वर्षों तक एक परिवार पर जो आरोप लगे, उनकी सच्चाई क्या है? सुधा के जीवित मिलने के बाद इस मामले में अब नया मोड़ आ गया है, जो आने वाले दिनों में और भी रोचक हो सकते हैं….

नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। नगरनौसा थाना क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। वर्ष 2018 में दहेज हत्याकांड के मामले में मृत घोषित की गई विवाहिता सुधा कुमारी 19 दिसंबर 2024 को पूर्णिया जिले के धमदाहा से जीवित पाई गई। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।

दरअसल नगरनौसा थाना क्षेत्र अंतर्गत चौरासी गांव के युगल पासवान के पुत्र कुंदन कुमार की शादी 2015 में पटना जिले के गौरीचक थाना क्षेत्र के अंडारी गांव निवासी हरिचन्द्र पासवान की पुत्री सुधा कुमारी के साथ हुई थी। यह शादी दनियावा के सूर्य मंदिर में संपन्न हुई थी और इसे आदर्श विवाह का नाम दिया गया था।

शादी के कुछ साल बाद सुधा अचानक गायब हो गई। इस घटना से परेशान सुधा के पिता हरिचन्द्र पासवान ने 2018 में हिलसा कोर्ट में दहेज हत्या का मामला दर्ज करवाया। उन्होंने अपने दामाद कुंदन कुमार, उसके पिता युगल पासवान और अन्य पर दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाया। कोर्ट के आदेश पर नगरनौसा थाना में प्राथमिकी संख्या 123/2018 दर्ज की गई।

इस मामले में नगरनौसा थाना पुलिस अपने तरीके से 6 वर्षों तक पड़ताल करती रही। लेकिन विवाहिता का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। सुधा को मृत मान लिया गया और उसके ससुराल वालों को हत्यारोपी के रूप में नामित किया गया। मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ता जा रहा था कि अचानक 19 दिसंबर 2024 को पुलिस को बड़ी सफलता मिली। पुलिस ने धमदाहा से सुधा कुमारी को जीवित बरामद किया।

पुलिस ने सुधा को कोर्ट में पेश किया। जहां उसका बयान दर्ज किया गया। सुधा ने बताया कि वह अपनी मर्जी से अपने ससुराल से अलग हो गई थी और अब वह दूसरे पति के साथ रह रही है। कोर्ट ने सुधा को उसके दूसरे पति के साथ जाने की अनुमति दे दी।

इस चौंकाने वाले मामले में हिलसा डीएसपी सुमित कुमार से बात करने की कोशिश की गई। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले की गहन जांच की जा रही है कि आखिर सुधा ने अपना ससुराल क्यों छोड़ा और उसने पिछले छह साल तक अपनी पहचान क्यों छिपाई।

सुधा के जीवित मिलने के बाद अब उसके ससुराल वालों पर लगाए गए आरोपों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह मामला सिर्फ गलतफहमी का था या इसमें कोई बड़ी साजिश छिपी हुई है? यह तो पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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