नालंदा DM ने राजगीर में गंगाजी राजगृह जलाशय का जायजा लिया

राजगीर (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने हाल ही में गंगा जल आपूर्ति योजना के तहत गंगाजी राजगृह जलाशय का विस्तृत निरीक्षण किया। इस भ्रमण कार्यक्रम का उद्देश्य राजगीर और नवादा में जलापूर्ति की प्रक्रिया को समझना और इसकी प्रगति का मूल्यांकन करना था। इस दौरान उन्होंने जलाशय के विभिन्न पहलुओं, जैसे गंगा नदी से अशोधित जल का उठाव, भंडारण, शोधन और वितरण प्रक्रियाओं की गहन जानकारी प्राप्त की।

वर्तमान में बाढ़ के मौसम में 1 जुलाई से हाथीदह, मोकामा के पास निर्मित इन्टेक-सह-पंप हाउस से गंगाजल को पंप के माध्यम से गंगाजी राजगृह जलाशय में भरा जा रहा है। जलाशय की कुल क्षमता 9.81 मिलियन घन मीटर है, जिसमें से अब तक लगभग 3.0 मिलियन घन मीटर जल संग्रहित किया जा चुका है। जिला पदाधिकारी ने जलाशय के महत्वपूर्ण अवयवों, जैसे स्पील्वे और बांध का बारीकी से निरीक्षण किया और संबंधित तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान श्री कुमार ने जलाशय निर्माण के कारण आसपास के क्षेत्रों में भूगर्भजल स्तर में हुई वृद्धि का आकलन करने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) को निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने डिटेंशन टैंक-सह-पंप हाउस का भी दौरा किया और वहां स्थापित पंपों के संचालन से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के क्रम में जिला पदाधिकारी ने मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा के दौरान घोषित पंचाने सिंचाई योजना के पुनर्स्थापन कार्य का भी जायजा लिया। इस योजना के तहत नहर प्रणाली का निरीक्षण किया गया और कार्य की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई। इस परियोजना के पूर्ण होने से 9880 एकड़ (4000 हेक्टेयर) ह्रासित कमांड क्षेत्र के साथ-साथ कुल 24700 एकड़ (10000 हेक्टेयर) कमांड क्षेत्र का पुनर्स्थापन संभव होगा।
इस परियोजना का लाभ नालंदा जिले के चार प्रखंडों गिरियक, सिलाव, राजगीर और बिहारशरीफ के विभिन्न पंचायतों, जैसे गिरियक, घोसरावां, प्यारेपुर, रैतर, पुरैनी, बराकर, पावाडीह, घोसतावां, गोरमा, करियन्ना, माहुरी, नानंद, नीरपुर, सब्बैत, नईपोखर, तेतरावां, छातो, सिन्धु और हरगांव के 60 गांवों के 50,000 से अधिक किसानों को मिलेगा। यह योजना सुनियोजित ढंग से सिंचाई सुविधा प्रदान कर किसानों की उत्पादकता और आजीविका को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त, प्रशिक्षु समाहर्ता, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, अपर समाहर्ता (आपदा), संबंधित कार्यपालक अभियंता, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी और अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। इस सामूहिक प्रयास ने परियोजना के सुचारू संचालन और इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।





