परवलपुर (नालंदा दर्पण)। परवलपुर नगर पंचायत में प्रशासनिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बजट पारित करने के लिए बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक शुरू होते ही वार्ड पार्षदों और कार्यपालक पदाधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद सभी पार्षदों ने सामूहिक रूप से बैठक का बहिष्कार कर दिया। इस घटनाक्रम ने नगर पंचायत के प्रशासनिक ढांचे, वित्तीय पारदर्शिता और विकास कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार नगर पंचायत सभागार में निर्धारित समय पर बजट बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में सभी वार्ड पार्षद उपस्थित हुए, लेकिन कार्यवाही शुरू होते ही विवाद उत्पन्न हो गया। वार्ड पार्षदों का आरोप है कि बिना किसी आधिकारिक प्रोसीडिंग दर्ज किए ही उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया। पार्षदों ने इसे न केवल नियमों के विरुद्ध बताया, बल्कि इसे प्रशासनिक अनियमितता और संभावित वित्तीय गड़बड़ी से भी जोड़कर देखा।
बैठक से बाहर निकलने के बाद पार्षदों ने सभागार परिसर में प्रदर्शन किया। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर “लूट का धंधा बंद करो”, “तानाशाही नहीं चलेगी”, “भ्रष्टाचार बंद करो”, “आय-व्यय का ब्यौरा दो” जैसे नारे लिखे हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी अश्वनी कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर पंचायत में कार्यप्रणाली पूरी तरह अपारदर्शी हो चुकी है।
वार्ड पार्षदों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया गया हो। उनका आरोप है कि बार-बार इस तरह का दबाव बनाकर प्रशासनिक फैसलों को बिना उचित रिकॉर्ड के आगे बढ़ाया जाता है, जिससे भविष्य में वित्तीय जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है। पार्षदों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्थानीय निकायों के नियमों का खुला उल्लंघन बताया।
एक पार्षद ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि कार्यपालक पदाधिकारी की मंशा ही बैठक को विवादित बनाकर विकास कार्यों को प्रभावित करने की है। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत क्षेत्र में कई योजनाएं पहले से लंबित हैं और इस प्रकार के विवादों के कारण सड़क, नाली, पेयजल, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं ठप पड़ी हुई हैं।
स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि बजट बैठक का बहिष्कार केवल एक औपचारिक विरोध नहीं, बल्कि नगर पंचायत के भीतर लंबे समय से चल रहे अविश्वास का परिणाम है। यदि बजट समय पर पारित नहीं होता है, तो आने वाले वित्तीय वर्ष में विकास योजनाओं के लिए राशि आवंटन और व्यय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
पार्षदों ने यह भी दावा किया कि पूरे मामले की शिकायत संबंधित मंत्री और वरीय अधिकारियों से की जा चुकी है। फिलहाल मामले की जांच जारी बताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी अश्वनी कुमार से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। उनके पक्ष के सामने नहीं आने से विवाद और भी गहरा गया है।
नगर पंचायत में जारी इस टकराव ने प्रशासनिक कार्यकुशलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जिला प्रशासन या नगर विकास विभाग हस्तक्षेप नहीं करता, तो यह विवाद क्षेत्रीय विकास को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच के बाद स्थिति सामान्य हो पाएगी और क्या नगर पंचायत का बजट पारदर्शी तरीके से पारित हो सकेगा। फिलहाल परवलपुर की जनता प्रशासनिक खींचतान के बीच विकास कार्यों के शुरू होने का इंतजार कर रही है।



