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राहुल गांधी का नालंदा दौरा टला, कांग्रेस का अति पिछड़ा सम्मेलन स्थगित, जानें बड़ी वजह

इस बीच विपक्षी दलों ने इस स्थगन को लेकर कांग्रेस पर तंज कसना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी को दर्शाता है। दूसरी ओर, कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि यह केवल एक तकनीकी देरी है, और पार्टी जल्द ही इस कमी को पूरा कर लेगी...

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के नालंदा जिले में होने वाला कांग्रेस का बहुप्रतीक्षित अति पिछड़ा सम्मेलन और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी का दौरा अप्रत्याशित रूप से स्थगित हो गया है। यह सम्मेलन 27 मई को आयोजित होने वाला था, जिसमें राहुल गांधी को मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेना था। लेकिन आयोजन स्थल की अनुपलब्धता के कारण बिहार कांग्रेस को यह कार्यक्रम टालना पड़ा, जिसके चलते राहुल गांधी का दौरा भी रद्द हो गया।

जानकारी के अनुसार बिहार कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को एकजुट करने के लिए इस सम्मेलन की योजना बनाई थी। इसके लिए 27 मई की तारीख तय की गई थी और नालंदा जिले के राजगीर को आयोजन स्थल के रूप में चुना गया था, जो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला भी है। पार्टी ने इस आयोजन को भव्य बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी थीं।

कांग्रेस नेताओं ने राजगीर में एक हॉल को आयोजन स्थल के रूप में चुना और उसकी बुकिंग की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन ऐन मौके पर हॉल के मालिक ने सूचित किया कि वह तारीख उपलब्ध नहीं है। इसके बाद पार्टी ने वैकल्पिक स्थलों की खोज शुरू की। लेकिन समय की कमी और उपयुक्त स्थान न मिल पाने के कारण अंततः आयोजन को स्थगित करने का फैसला लिया गया।

बिहार कांग्रेस के नेताओं ने इस स्थगन को अस्थायी बताया है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि  हमें तकनीकी कारणों से इस आयोजन को टालना पड़ा है। जल्द ही नई तारीख की घोषणा की जाएगी। राहुल गांधी अब संभवतः जून के पहले सप्ताह में बिहार का दौरा करेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नई तारीख और स्थान को लेकर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। ताकि इस सम्मेलन को और भव्य तरीके से आयोजित किया जा सके।

गौरतलब है कि राहुल गांधी पिछले पांच महीनों में चार बार बिहार का दौरा कर चुके हैं। हाल ही में 15 मई को उनके दौरे के दौरान उन्होंने दरभंगा के आंबेडकर हॉस्टल में दलित छात्रों के साथ संवाद किया था। इसके बाद वे पटना पहुंचे, जहां उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता पर केंद्रित ‘फुले’ फिल्म देखी। बिहार में उनकी सक्रियता को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

नालंदा में प्रस्तावित यह सम्मेलन बिहार कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। क्योंकि यह पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को एकजुट करने का एक बड़ा मंच हो सकता था। बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं, और कांग्रेस इस आयोजन के जरिए इन वर्गों के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहती थी। लेकिन आयोजन स्थल की कमी के कारण हुए इस स्थगन ने पार्टी की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस स्थगन से पार्टी की रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वे जल्द ही नई तारीख और स्थान की घोषणा करेंगे। साथ ही राहुल गांधी के बिहार दौरे को और प्रभावी बनाने के लिए पार्टी नए सिरे से रणनीति तैयार कर रही है।

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