Wednesday, February 11, 2026
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    दूध उत्पादन में आई 25 फीसदी की गिरावट, जानें क्यों परेशान हैं पशुपालक 

    नालंदा दर्पण डेस्क। मौसम के बदलते भीषण गर्म तेवर के कारण इन दिनों खेतों में लगे हरा पशुचारा पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। प्रखंड में घास की किल्लत हो गयी है। इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ा है।

    मार्च और अप्रैल की अपेक्षा इस मई में करीब 25 फीसदी दूध उत्पादन में गिरावट हो गयी है। इसका नुकसान पशुपालकों को उठाना पड़ रहा है।  हिट वेव के कारण दूध की गुणवता में भी गिरावट आई है। इससे पशुपालकों की आय में कमी आयी है।

    डेयरी संचालकों के अनुसार गर्मी के कारण पशुपालक दूध के सीएनएफ में गिरावट आई है। जिससे किसान को दूध में फैट की मात्रा के कमी के कारण पा पशुपालक को सही कीमत नहीं मिल रहा है। न्ही किसानों को शून्य कीमत अंकित हो रही है। जिसे किसानों की आय में कमी हो गई है।

    इतना ही नहीं घटते उत्पादन इफेक्ट डेयरी उद्योग पर भी दिख रहा है। प्रखंड क्षेत्र में सुधा डेयरी की करीब 22 समितियां हैं। इनसे पांच हजार से ज्यादा पशुपालक जुड़े हैं। पहले हर दिन समितियों द्वारा करीब 4000 लीटर दूध की आपूर्ति रोज की जाती थी। लेकिन वर्तमान में रोज करीब 2500 लीटर दूध कम ही संग्रह हो पा रहा है।

    भैस की दूध में सबसे अधिक गिरावट: पशुपालकों के अनुसार हीटवेव की वजह से सबसे ज्यादा भैंस के दूध में गिरावट आयी है। अमूमन भैंस को पालक खुले स्थानों पर रखते हैं।

    साथ ही हर दिन खाली पड़े खेतों में उसे घास चराते हैं। परंतु, वीरान खेतों में हरा चारा ढूंढे नहीं मिल रहा है। आसमान से आग उगलने के कारण खेत वीरान हैं। पशु के लिए लगा हरा चारा घास में वृद्धि नहीं हो पा रही है।

    मॉनसून के बाद ही उत्पादन में वृद्धि की संभावनाः  फिलहाल हरा चारा की किल्लत के बीच गर्मी की मवेशी भर भेट भोजन नहीं कर पा रहे हैं। इसक सीधे-सीधे असर दूध उत्पादन पर पड़ा है।

    किसानों की माने तो मानसून बारिश के बाद ही दूध का उत्पादन बढ़ सकता है। अभी खेतों में लगी मूंगी की फसल भी तेज धूप के कारण खराब हो रही है।

    यही स्थिति अन्य फसलों की है। बारिश नहीं होने से खेतों में नमी गायब हो गई। अन्य फसल सूखने की कगार पर हैं। हरा चारा की स्थिति विकराल बन गई है।

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