बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। झारखंड में भारी बारिश के कारण उदेरा स्थान से 1.15 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नालंदा जिले में बाढ़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार की अध्यक्षता में आज एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ संभावित बाढ़ से निपटने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने बताया कि एकंगरसराय, हिलसा, अस्थावां, बिंद और गिरियक प्रखंडों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इन क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को माइकिंग के माध्यम से सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वार्ड सदस्यों को गांवों में जाकर लोगों को सतर्क करने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से ही पूरी की जाएं। संवेदनशील क्षेत्रों में निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है-
तटबंधों की सुरक्षा: बालू से भरे बोरे, बांस बल्ला, हाथी पांव बल्ला, लाइट जनरेटर युक्त वाहन और पर्याप्त संख्या में श्रमिकों की व्यवस्था। तटबंध कटाव की सूचना मिलते ही तुरंत मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश।
आपदा प्रबंधन: सामुदायिक रसोई, सूखा राशन, टेंट, पॉलिथीन शीट्स आदि की पहले से व्यवस्था।
बचाव कार्य: एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैयार रखने के साथ-साथ नाव और नाविकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश।
जिलाधिकारी ने जनता से अपील की कि संभावित बाढ़ के खतरे से घबराने की जरूरत नहीं है। जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
इस बैठक में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, अपर समाहर्ता (आपदा), जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, जिला माइनिंग ऑफिसर, डीपीओ मनरेगा, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, विशेष कार्य पदाधिकारी (गोपनीय शाखा) सहित अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।



