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10 साल का मासूम बना फिरौतीबाज, व्हाट्सऐप के जरिए मांगी 10 लाख की फिरौती!

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले से एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने आम लोगों के साथ-साथ पुलिस को भी चौंका कर रख दिया है। यहां महज 10 साल के एक मासूम ने गुमशुदा लड़के के परिवार से पूरे 10 लाख रुपये की फिरौती मांग ली और वो भी व्हाट्सऐप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए। यह मामला न केवल बच्चों की बढ़ती डिजिटल पहुंच की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे कम उम्र में भी बच्चे तकनीक का दुरुपयोग करने लगे हैं।

घटना 6 जून की है। न्यू नालंदा कॉलोनी निवासी मनीष कुमार का 15 वर्षीय बेटा सौरभ उर्फ भोला कोचिंग के लिए घर से निकला और रात तक वापस नहीं लौटा। बेटे की गुमशुदगी से घबराई मां उषा देवी ने तुरंत लहेरी थाना में शिकायत दर्ज करवाई।

सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि सौरभ बस में बैठकर कहीं जा रहा था। परेशान पिता ने फेसबुक पर बेटे की तस्वीर और अपना मोबाइल नंबर साझा कर मदद की गुहार लगाई।

उसके बाद 8 जून को मनीष कुमार के मोबाइल पर एक अनजान व्हाट्सऐप नंबर से मैसेज आया, जिसमें बेटे को छोड़ने के बदले 10 लाख रुपये की मांग की गई थी। संदेश भेजने वाला बार-बार मोबाइल रिचार्ज और पैसे भेजने की बात कर रहा था।

पिता ने इस संदिग्ध हरकत की सूचना तुरंत पुलिस को दी। साइबर सेल और तकनीकी टीम ने जब जांच की तो पता चला कि व्हाट्सऐप नंबर जहानाबाद जिले के घोषी थाना क्षेत्र के एक गांव से सक्रिय था।

उसके बाद जब पुलिस ने गांव में छापा मारा तो वहां से एक मोबाइल बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान एक शख्स ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि यह फोन उसका 10 वर्षीय बेटा, जो प्रथम कक्षा में पढ़ता है, इस्तेमाल कर रहा था।

बच्चे से पूछताछ करने पर उसने स्वीकार किया कि उसने फेसबुक पर गुमशुदा लड़के की पोस्ट देखी थी और पैसों के लालच में व्हाट्सऐप पर फिरौती मांगने वाले मैसेज भेज दिए थे। बाद में उसने सारे मैसेज डिलीट कर दिए।

सबसे दिलचस्प मोड़ 10 जून को आया। जब गुमशुदा सौरभ खुद परिवार के साथ थाने पहुंचा। उसने पुलिस को बताया कि वह मुंबई के कल्याण इलाके में घूमने चला गया था। यह बात सुन पुलिस और परिजन दोनों सन्न रह गए।

नालंदा पुलिस ने इस मामले को साइबर अपराध का नया चेहरा करार दिया है। पुलिस ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के मोबाइल उपयोग और सोशल मीडिया गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखें। समय रहते बच्चों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अनजाने में अपराध की दुनिया में कदम रख सकते हैं।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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